निदेशालय के अनुसार यह देखा गया कि दाखिले में आवेदकों की ओर से पते, नाम या किसी अन्य संबंधित व्यक्तिगत विवरण में हेरफेर कर कई आवेदन किए जा रहे हैं। जिससे कि कम्प्यूटरीकृत ड्रॉ में उनके चयन की संभावनाएं बढ़ जाए। इससे आवेदकों को कई स्कूलों में दाखिला भी लिया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आधार कार्ड की अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे मामलों को रोकने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य किया जा रहा है। इससे वास्तविक रुप से ईडब्लयूएस, वंचित वर्ग व विशेष जरुरत वाले बच्चों को दाखिले का लाभ मिल सकेगा।
परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि पंजीकरण केसमय आधार कार्ड के लिए एकत्र की गई जानकारी केवल न्यूनतम होगी। इससे संबंधित व्यक्तिगत विवरण किसी अन्य एजेंसी के साथ साझा नहीं किए जाएंगे। मालूम हो कि मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 की धारा 12(1) (सी) केतहत सभी निजी स्कूल प्रवेश स्तर की कक्षाओं की 25 फीसदी सीटों पर ईडब्लयूएस, वंचित वर्ग, व विशेष जरुरत वाले बच्चों को दाखिला देने के लिए बाध्य है।