दिल्ली के मुखर्जी नगर स्थित बाल सुधार गृह (सेवा कुटीर) में रह रहे बाल कैदियों ने भागने के लिए कमरे की दीवार तोड़ दी। इससे पहले कि वे भाग पाते एक वार्डन ने टूटी हुई दीवार देख ली और इसकी शिकायत बाल सुधार गृह के अधिकारियों को दे दी।
साथ ही फोन कर पुलिस को भी घटना के बारे में सूचना दे दी गई। पुलिस ने घटना की पुष्टि की है। हालांकि, बाल सुधार गृह प्रशासन की ओर से लिखित शिकायत नहीं मिलने की वजह से मामला दर्ज नहीं किया गया है।
बाल सुधार गृह के सूत्रों के मुताबिक, लूट और चोरी के मामले में बंद पांच बाल कैदी एक कमरे में रहते हैं। रविवार दोपहर को वहां काफी शोर हो रहा था। शक होने पर वार्डन कमरे के अंदर गया तो एक दीवार के पास कुछ मिट्टी गिरी हुई देखी।
खिड़की के सरिये से दीवार में लगाई सेंध
उसके ठीक ऊपर दीवार से सटाकर कैरम बोर्ड रखा हुआ था। कैरम बोर्ड हटाने पर पता चला कि दीवार में सेंध लगाई गई है। उसमें से एक आदमी आसानी से बाहर जा सकता था। अधिकारियों ने अपराह्न तीन बजे इसकी जानकारी पुलिस को दी।
उसके बाद अधिकारियों ने कमरे में रहने वाले पांच बाल कैदियों से पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने बताया कि दो दिन से सभी इस काम को अंजाम देने में लगे हुए थे। उन लोगों ने सेंध लगाने के लिए खिड़की से एक सरिया निकाल लिया था।
दीवार की ईंट निकालने के समय वे शोर मचाने लगते थे। जिस समय वार्डन को इसकी जानकारी मिली, कैदियों को बस एक ही ईंट निकालनी थी। उनका इरादा रविवार रात में ही भागने का था। हालांकि, इससे पहले सुधार गृह में बाल कैदियों द्वारा सुरंग बनाने की कोशिश की बात सामने आई थी।
जोर से गाना गाने से शक गहराया था शक
सूत्रों के मुताबिक, बाल कैदियों द्वारा जोर से गाना गाने और गेट पीटने की वजह से इस सेंधमारी का शक गहराया। आरोपियों ने यह सब सेंध लगाने के दौरान होने वाली आवाज बाहर तक न पहुंचने देने के लिए ऐसा किया।
कमरे में रहने वाले पांचों बाल कैदी दो दिन पहले से गाना गा रहे थे, लेकिन रविवार दोपहर को इन लोगों ने गाना गाने के साथ साथ गेट को पीटना भी शुरू कर दिया था। इससे वार्डन को शक। पहली नजर में वार्डन को कमरे में सब कुछ सामान्य लगा, लेकिन जब उन्होंने दीवार के पास मिट्टी देखी तो मामले का पता चला।
किशोरों के झगड़े की सूचना, नहीं खोदी सुरंग
महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक सौम्या गुप्ता ने बताया कि दीवार में सेंध लगाने या सुरंग खोदकर भागने की कोशिश का कोई मामला मुखर्जी नगर स्थित होम में सामने नहीं आया है। इतना जरूर है कि किशोर आपस में लड़ रहे थे। यह बिल्कुल बेबुनियाद है कि सुरंग खोदी जा रही थी।
खाने में चाऊमीन और शाम को बॉलीवुड तड़का
दिल्ली के बाल सुधार गृहों में किशोरों को सही रास्ते पर लाने के लिए महिला एवं बाल विकास ने नया तरीका अपनाया है। बंदियों को खाने में रोटी-चावल के साथ ही सप्ताह में दो दिन चाऊमीन या कुछ दूसरी चीज दी जाती है। वहीं, सुबह भजन और दोपहर व शाम को एक-एक घंटे फिल्मी गाने सुनाए जाते हैं।
साथ ही उन्हें खेलकूद, मेडिटेशन और लाइब्रेरी की सुविधा भी दी गई है। मुखर्जी नगर, मजनूं का टीला व दिल्ली समेत कई जगह बने बाल सुधार गृहों में रह रहे किशोरों को सही रास्ते पर लाने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। इसके तहत गृह में सुविधाएं बढ़ाने, शौचालय की संख्या बढ़ाने के अलावा स्टाफ भी बदला गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक सौम्या गुप्ता कहती हैं कि किशोरों को खाली समय नहीं मिले इसलिए तरह-तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बास्केटबॉल और वॉलीबाल कोच ट्रेनिंग देते हैं। टीवी की सुविधा में दिक्कत है लेकिन फिर भी एक जगह यह लगाया गया है।