फ्री में कुछ नहीं मिलता है
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि छात्रों को अच्छी और फ्री शिक्षा मिली है। लेकिन फ्री कुछ भी नहीं मिलता है। बच्चों की शिक्षा में देश के लोगों का पैसा लगा है। देश में गरीब आदमी भी टैक्स देता है। दूध, दही, किताब, माचिस खरीदते हैंए तो उस पर टैक्स लगता है।
बच्चों ने साबित किया कि मुश्किलों के बावजूद अच्छे से पढ़ सकते हैं
उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पिछले 7 सालों से लगातार दिल्ली के सरकारी स्कूलों को शानदार बनाने का काम किया जा रहा है। रहे है। नीट और जेईई में सफल रहे बच्चों की बड़ी संख्या उसी काम का नतीजा है। उन्होंने कहा कि छात्रों ने आर्थिक और भावनात्मक रूप से अपने जीवन में सबसे कठिन समय देखा है। उन्होंने साबित कर दिया है कि मुश्किलों के बावजूद वो अच्छे से पढ़ सकते हैं, कड़ी मेहनत कर सकते हैं।
माता-पिता की मौत के बाद भी लक्ष्य नहीं भूले
दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-17 स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास करने वाले करण तनेजा ने नीट की परीक्षा में 402 जनरल-ईडब्ल्यूएस रैंक हासिल किया है। 11वीं कक्षा में उन्होंने इस स्कूल में एडमिशन लिया था। करण तनेजा मात्र 10 साल के थे, उस दौरान उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी। माता-पिता का सपना था कि भविष्य में करण डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करें। करण का बड़ा भाई दुकान में काम करता है और हर माह केवल 8 हजार रुपये कमाकर परिवार की जरुरतों को पूरा कर रहा है। करण को स्कूल के शिक्षकों और एचओएस और लाइब्रेरियन का काफी स्पोर्ट मिला और उन्हें लाइब्रेरी से किताबें देने में भी मदद की।
बिना किसी कोचिंग के नीट की परीक्षा में सफलता हासिल की
तुगलकाबाद स्थित रेलवे कॉलोनी, एसकेवी रानी झांसी से 12वीं की परीक्षा पास करने वाली अंजलि सिंह ने नीट की परीक्षा में 598 रैंक हासिल की है। अंजलि के पिता सुरक्षा गार्ड हैं और मां गृहिणी हैं। आर्थिक तंगी के कारण अंजलि को निजी स्कूल छोडना पड़ा। बाद में उन्होंने सरकारी स्कूल में दाखिला लिया। अंजलि ने बिना किसी कोचिंग के नीट की परीक्षा में सफलता हासिल की है और अपने परिवार में वह डॉक्टर की पढ़ाई करने वाली पहली लड़की है।