सम्मेलन की शेष परिचर्चा व न्यायाधीशों का विचार-विमर्श तीन से सात नवंबर तक लखनऊ में सीएमएस कानपुर रोड ऑडिटोरियम में सम्पन्न होगा। इस मौके पर मॉरीशस के उपराष्ट्रपति मैरी सिरिल बोइसेजोन ने कहा कि युद्ध व आतंकवाद से त्रस्त वैश्विक परिस्थितियों में आज विश्व एकता व विश्व शांति की आवश्यकता है।
राजधानी में बृहस्पतिवार को 24वें अंतरराष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन के पहले सत्र का आयोजन हुआ। सिटी मॉटेसरी स्कूल (सीएमएस) लखनऊ की ओर से कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस सम्मेलन में 61 देशों के मुख्य न्यायाधीश व अन्य प्रख्यात हस्तियां शामिल हुई।
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सम्मेलन की शेष परिचर्चा व न्यायाधीशों का विचार-विमर्श तीन से सात नवंबर तक लखनऊ में सीएमएस कानपुर रोड ऑडिटोरियम में सम्पन्न होगा। इस मौके पर मॉरीशस के उपराष्ट्रपति मैरी सिरिल बोइसेजोन ने कहा कि युद्ध व आतंकवाद से त्रस्त वैश्विक परिस्थितियों में आज विश्व एकता व विश्व शांति की आवश्यकता है। विश्व की विषम परिस्थितियों में भी मॉरीशस व भारत ही लोकतंत्र के सजग प्रहरी का दायित्व निभा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्य न्यायाधीशों का यह सम्मेलन विश्व एकता व शांति की राह में महत्वपूर्ण साबित होगा। वहीं सम्मेलन के संयोजक एवं सिटी मॉटेसरी स्कूल लखनऊ के संस्थापक डा. जगदीश गांधी ने कहा कि आज वैश्विक उथल-पुथल के बीच सभी देश भारत की ओर आशा की नजर से देख रहे हैं। ऐसे में विश्व के ढाई अरब बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 सारी दुनिया के लिए संजीवनी है, वह विश्व में एकता एवं शांति की स्थापना के लिए जोर देता है।
सम्मेलन में विभिन्न देशों के मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाधीशों व कई अन्य प्रख्यात हस्तियों ने अपने विचार रखे और समस्त विश्व समुदाय से एकता व शांति का आह्वान किया। इस मौके पर ट्यूनीशिया के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता अब्देसतार बेन मौसा, क्रोएशिया के पूर्व राष्ट्रपति स्टीपन मेसिक, किरिबाती रिपब्लिक के पूर्व राष्ट्रपति तेबुरोरो टीटो, हेती के पूर्व प्रधानमंत्री जीन-हेनरी सेन्ट, लेसोथो के पूर्व प्रधानमंत्री डा. पकालिथा बी. मोसिलिली, किंग्सफोर्ड बैगबिन अल्बान सुमना, घाना संसद के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति लियोनार्डा ब्रैंट आदि ने भी विचार व्यक्त किए। स्कूल के जनसंपर्क अधिकारी ऋषि खन्ना ने बताया कि 61 देशों के लगभग 250 मुख्य न्यायाधीशों व अन्य गणमान्य हस्तियों ने सम्मेलन से पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए व विश्व में शांति स्थापना के लिए प्रार्थना की।