रविवार ओपीडी के लिए अब पूरे महीने का रोस्टर तैयार हो चुका है। आगामी प्रत्येक रविवार से केंद्र सरकार के अलग अलग अस्पतालों में रविवार को ओपीडी संचालित होगी। इसके लिए एक-एक फैकल्टी सदस्य और दो रेजीडेंट डॉक्टर की सप्ताह वार सप्ताह ड्यूटी लगाई गई है। सफदरजंग, आरएमएल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में पहला दिन सफल रहने के बाद अब पूरे महीने के लिए यह रोस्टर जारी कर दिया है। रविवार को न सिर्फ ओपीडी, बल्कि जांच कराने के लिए लैब और दवा के लिए फॉर्मेसी भी संचालित होगी।
दरअसल, हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने अलग अलग अस्पतालों का निरीक्षण करने के बाद रविवार के दिन भी ओपीडी संचालित करने को लेकर ईच्छा जाहिर की थी जिसके बाद एम्स प्रबंधन ने इस फैसले पर निर्णय नहीं लिया लेकिन अन्य तीनों अस्पतालों ने बीते 10 अक्तूबर को पहले पायलट तौर पर ओपीडी चलाई लेकिन सभी व्यवस्थाएं उचित रहने के बाद अब इसे आगे के लिए लागू कर दिया है। इस बीच रविवार ओपीडी को लेकर रेजीडेंट डॉक्टर और उनके संगठन लगातार विरोध जता रहे हैं।
तमाम फेडरेशन ने लिखा स्वास्थ्य मंत्री को फैसला बदलने का पत्र
फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) से लेकर फेमा सहित तमाम संगठन ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिख इस फैसले पर रोक लगाने की मांग भी की है। वहीं एम्स से लेकर इन सभी अस्पतालों के रेजीडेंट डॉक्टरों ने सोशल मीडिया पर भी यह मांग उठाना शुरू कर दिया है जिसे अन्य लोग भी शेयर कर रहे हैं। इनका कहना है कि रेजीडेंट डॉक्टर पूरे सप्ताह बगैर किसी अवकाश लिए काम करता है। एक सप्ताह में कम से कम एक दिन का आराम उसे भी चाहिए होता है लेकिन अगर रविवार को ओपीडी चलेगी तो यह मौका भी उसे नहीं मिल पाएगा। इसलिए रविवार ओपीडी का फैसला गलत है।
वहीं, इस मामले को लेकर जब अधिकारियों से बातचीत हुई तो पता चला कि रेजीडेंट की मांग अपनी जगह है और मरीजों का इलाज अपनी जगह। ड्यूटी रोस्टर को इस तरह बनाने के लिए कहा गया है ताकि मरीज और डॉक्टर सभी की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सेवाएं जारी रखी जाएं। अधिकारियों ने फैसला रद्द करने को लेकर सिरे से इनकार करते हुए आगे भी रविवार ओपीडी संचालित रखने की जानकारी दी है।