सीबीआई ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दफ्तर के कर्मचारियों को पूछताछ के लिए समन दिया है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने नोटिस जारी किए बगैर फोन कर ही कर्मचारियों को बुलाया है।
बता दें कि सीबीआई ने दिल्ली सचिवालय पर सीएम अरविंद केजरीवाल के प्रमुख सचिव राजेश कुमार के दफ्तर पर छापा मारा था। इसी मामले में सीबीआई दफ्तर के कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है।
केजरीवाल ने एक समाचार पत्र की खबर को ट्वीट करते हुए जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि सीबीआई ने सीएम केजरीवाल के स्टाफ को नोटिस दिए बिना फोन पर समन दिया है।
हालांकि सीबीआई ने केजरीवाल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके दफ्तर के स्टाफ को नहीं बुलाया गया है।
CBI summons Delhi CM's staff "informally" on phone without notice. Staff of other ministers called earlier like this pic.twitter.com/mJXMSU0kG3
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) March 8, 2016
जानिए क्या है पूरा मामला
दिल्ली सचिवालय पर सीबीआई छापा
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने छापेमारी के बाद कहा था कि सीबीआई ने उनके दफ्तर पर छापा मारा। जबकि जांच एजेंसी ने दावा किया था कि दिल्ली के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर की जांच के लिए छापा मारा गया।
सीबीआई की कार्रवाई पर आम आदमी पार्टी आगबबूला हो गई थी। इसके बाद पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के तमाम नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
इतना ही नहीं छापों से नाराज अरविंद केजरीवाल ने टि्वटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कायर और मनोरोगी कहा था। अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर सीबीआई छापों की जानकारी देते हुए और कहा था, ''मोदी राजनीतिक रूप से मुझसे नहीं लड़ पर रहे हैं, इसलिए वे कायरता दिखा रहे हैं। मोदी कायर और मनोरोगी हैं।''
छापे की कार्रवाई का टि्वटर पर अपडेट देते हुए केजरीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री दफ्तर की फाइलें खंगाली जा रही हैं। उन्होंने कहा, ''मोदी ये बताएं उन्हें कौन सी फाइल चाहिए। राजेंद्र के बहाने मेरे दफ्तर की सारी फाइल देखी जा रही हैं।''
तबादले से बदलेंगे केंद्र और दिल्ली के संबंध?
केजरीवाल और नरेंद्र मोदी
केजरीवाल ने केंद्र पर सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। सीबीआई की कार्रवाई और जांच के चलते अब एक बार फिर केजरीवाल सरकार और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। केजरीवाल खुद को बेवजह निशाना बनाए जाने का आरोप लगातार केंद्र पर लगाते रहे हैं।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से हमेशा कहा जाता रहा है कि छापा केजरीवाल के दफ्तर पर नहीं, बल्कि चीफ सेक्रेटरी राजेश कुमार के दफ्तर पर था। दरअसल ज्वाइंट सेक्रेटरी के लेवल से ऊपर के किसी नौकरशाह के खिलाफ जांच या उसकी ऑफिस की तलाशी के लिए सीबीआई को पहले सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है।
ऐसे में 2003 में एनडीए सरकार की ओर से लाया गया दिल्ली पुलिस स्पेशल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के सेक्शन 6ए के तहत सीबीआई को ऐसा करना चाहिए।इससे पहले इस मामले में केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई द्वारा जब्त दस्तावेजों की भी मांग थी। इस पर सुनवाई के लिए कोर्ट तैयार भी हो चुका है।
हालांकि अफसरों के तबादले का ताजा मामला केंद्र और दिल्ली सरकार की जंग में अपवाद है। जहां दिल्ली सरकार के प्रतिकूल काम करने वाले अफसरों के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तबादले किए हैं।