घटना के बाद पुलिस को दी सूचना
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि रोजी को अस्पताल लाने के बाद डॉ. बिश्नोई को उसकी गंभीर हालत के बारे में सूचना दी गई थी, लेकिन उन्होंने डॉ. अश्क, जिसे स्त्री रोगों से जुड़े गंभीर केस संभालने का कोई अनुभव नहीं था, उसे रोजी का उपचार करने को कहा। इसके करीब साढ़े चार घंटे बाद वह अस्पताल आए और रोजी के परिजन को रक्त की व्यवस्था करने को कहा। इस बीच उसकी मौत हो गई। इसके बाद डॉ. बिश्नोई ने बिजवासन थाना पुलिस को उसकी मौत के बारे में लिखित सूचना दी। पत्र में लिखा कि उसे सिविल अस्पताल रेफर किया गया था।
डिस्चार्ज कार्ड में पाई गड़बड़
सीबीआई का कहना है कि डॉ. बिश्नोई ने रोजी का डिस्चार्ज कार्ड बनाया था, उसमें भर्ती होने का समय सुबह 6 बजे और रेफर किए जाने का समय दोपहर 12 बजे बताया। उसे ब्लड चढ़ाने और अन्यत्र रेफर करने का भी जिक्र है, लेकिन रोजी को रेफर ही नहीं किया गया था।
सांसद ने गृहमंत्री से की थी शिकायत
घटना के बाद सांसद अगथा संगमा ने पत्र लिखकर इस मामले की शिकायत गृहमंत्री अमित शाह से की थी। उन्होंने बताया कि अस्पताल की लापरवाही से रोजी की मौत हो गई। उसके भतीजे सैमुअल ने चिकित्सकों की लापरवाही पर सवाल उठाए तो उसके साथ दुर्व्यवहार किया। उसने पूरी घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाई, लेकिन अगले दिन वह होटल के कमरे में फंदे से लटका मिला। इसके बाद गृहमंत्रालय ने इस मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया था।
क्या था मामला
दिल्ली के कापसहेड़ा क्षेत्र में रहने वाली रोजी संगमा मूल रूप से नगालैंड के दीमापुर की रहने वाली थी। 23 जून की रात अचानक तबीयत खराब होने के बाद उसे उपचार के लिए पहले पालम विहार के निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया था, लेकिन खर्च अधिक आने की बात सुनकर परिजन उसे सेक्टर-10 में स्थित अल्फा हेल्थ केयर अस्पताल ले गए। तब मृतका के जीजा शेखर गांगुली ने आरोप लगाया था कि रोजी की मौत उपचार के दौरान लापरवाही से हुई है।