मनीष सिसोदिया, के कविता और अरविंद केजरीवाल
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दिल्ली आबकारी नीति मामले में सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल व आप विधायक दुर्गेश पाठक समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामले में विस्तृत भूमिका का हवाला दिया। सीबीआई ने कहा कि केजरीवाल ने गोवा में पार्टी के प्रचार के लिए पैसे ऐंठने में अहम भूमिका निभाई। सीबीआई ने अदालत से आरोपपत्र पर संज्ञान लेने का आग्रह किया।
राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष जज कावेरी बावेजा के समक्ष सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अन्य सबूतों के साथ-साथ व्हाट्सएप चैट भी पेश की, जिसमें दिखाया गया कि केजरीवाल ने गोवा में आप के प्रचार के लिए पंजाब में लोगों से पैसे ऐंठने में किस तरह से भूमिका निभाई। कार्यवाही के दौरान, सीबीआई के वकील ने कथित अपराध की आय का विवरण दिया।
बताया गया कि केजरीवाल के मीडिया मैनेजर ने साउथ ग्रुप के साथ बातचीत की थी। इस समूह से एकत्र किए गए धन को गोवा चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) के अभियान के लिए इस्तेमाल किया। वकील ने यह भी संकेत दिया कि केजरीवाल ने आप उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता का वादा करते हुए अपने प्रचार पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी थी। राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपपत्र के संज्ञान पर फैसला 3 सितंबर के लिए सुरक्षित रख लिया। साथ ही केजरीवाल व अन्य की न्यायिक हिरासत अवधि भी 3 सितंबर तक बढ़ा दी।
केजरीवाल के सह आरोपियों ने महादेव लिकर को बंद करने का दबाव डाला : वकील ने यह भी सबूत पेश किए कि केजरीवाल के सह-आरोपी ने के कविता की निजी सहायक के साथ समन्वय किया। सह-आरोपी ने व्हाट्सएप मैसेज और गवाहों के बयानों के साथ महादेव लिकर को बंद करने के लिए दबाव डाला था। इसके अतिरिक्त वकील ने दावा किया कि पंजाब में आप की जीत के बाद अमित अरोड़ा ने आप के लिए एक माध्यम के रूप में काम करते हुए महादेव लिकर से संबंधित रिश्वत देने के लिए व्यक्तियों को निर्देश व धमकी दी। सीबीआई के मामले में व्हाट्सएप चैट और अन्य दस्तावेजों के साक्ष्य शामिल हैं, जो पंजाब और साउथ ग्रुप के व्यापारियों से आप के गोवा चुनावों के लिए कथित वित्तीय लेनदेन को दर्शाते हैं।
केजरीवाल ने हर प्रत्याशी को 90 लाख देने का वादा किया
आरोप हैं कि केजरीवाल ने 40 निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्येक उम्मीदवार को 90 लाख रुपये देने का वादा किया था। मगुंटा रेड्डी से संबंधों की भी जांच की जा रही है। मामले में एक अन्य प्रमुख व्यक्ति दुर्गेश पाठक पर गोवा चुनावों में आप के अभियान की देखरेख करने का आरोप है। सीबीआई का तर्क है कि चुनाव संबंधी खर्चों का प्रबंधन नकद में किया गया था, जिससे वित्तीय लेनदेन की कड़ी और जटिल हो गई। आरोपपत्र में विनोद चौहान का भी नाम है, जिस पर बीआरएस नेता के कविता के निजी सहायक के साथ समन्वय करने और आशीष माथुर के साथ वित्तीय मामलों को संभालने का आरोप है।