ग्रेटर नोएडा में नवादा गांव के पास बृहस्पतिवार देर रात कार में आग लगने से आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन की जलने से मौत हो गई।
पुलिस इसे हादसा ही मान रही है, लेकिन चंद्रमोहन की पत्नी सविता शर्मा इस घटना को हादसा मानने से इनकार कर रही हैं। सविता का कहना है कि साजिश रचकर उनके पति की हत्या की गई है। इस शिकायत पर पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
सविता ने कहा कि चंद्रमोहन कासना गांव में एक जमीन को कब्जे से बचाने की कोशिश कर रहे थे। इसी को लेकर गांव के कुछ लोगों से उनका विवाद चल रहा था।
रात को कंपनी से लौटते हुए हादसा
शुक्रवार रात करीब 11:10 मिनट पर वह कंपनी से अल्फा-दो के एफ-38 के लिए अपनी कार से चले थे। लेकिन कंपनी से मात्र दो किलोमीटर की दूरी नवादा गांव और जेपी ग्रीन के बीच सड़क पर अचानक उनकी कार में आग लग गई।
चंद मिनट में आग ने विकराल रूप ले लिया। किसी राहगीर ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दमकल विभाग को सूचना दी और फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंच गई। लेकिन जब तक आग पर काबू पाया तब तक कार चला रहे चंद्रमोहन की मौत हो चुकी थी।
हालांकि पुलिस को उस समय तक पता नहीं था कि कार में किसी व्यक्ति की जलने से मौत हुई है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और जांच-पड़ताल में जुट गई।
नहीं हो पाई थी शव की पहचान
चंद मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया। एक राहगीर ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन जब तक फायर ब्रिगेड पहुंची तब तक चंद्रमोहन की मौत हो चुकी थी। पूरी कार में सब कुछ जल गया था। पुलिस को ऐसा कुछ नहीं मिला, जिससे शव की शिनाख्त हो।
शुक्रवार सुबह 10 बजे पुलिस अधिकारियों ने कार के रिम पर लिखे 2008 के आधार पर किसी तरह कार मालिक का नाम खोज लिया और चंद्रमोहन के परिजनों तक पहुंची।
ग्रेटर नोएडा के एसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश देनी शुरू कर दी है। सूरजपुर कोतवाली में जानलेवा मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद आरोपियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। जिन्हें गिरफ्तार भी किया गया था और मामला अदालत में विचाराधीन है।
चंद्रमोहन को जान से मारने की मिली थी धमकी
आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्रमोहन ने कासना कोतवाली में 30 अप्रैल को एक तहरीर दी थी। जिसमें कासना गांव के एक व्यक्ति पर आरोप लगाया था। तहरीर में कहा था कि वह 28 अप्रैल को उसे होंडा सीएल कंपनी में ड्यूटी करने के लिए जा रहा था।
लेकिन रास्ते में परीचौक पर कासना निवासी व्यक्ति मिला और कहा कि शिव मंदिर वाली जमीन पर ज्यादा आरटीआई मत डाल नहीं तो जान गवानी पड़ जाएगी। इसके अलावा आरोप था कि अब उसका समय उल्टा चलने लगा और अब वह ज्यादा दिन का नहीं है।
कासना पुलिस ने तहरीर की रिसीविंग भी दी थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। इस घटना के करीब 24 घंटे बाद ही चंद्रमोहन की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई। यह बात लोगों और परिजनों के गले नहीं उतर रही है।
सच हुई धमकी
आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्र मोहन की शादी कासना गांव निवासी सविता शर्मा से हुई थी। कासना गांव में शिव मंदिर की 500 गज जमीन पर कासना के ही कुछ लोग कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे। जिनका चंद्रमोहन के ससुरालियों द्वारा विरोध किया जा रहा था।
शादी के बाद से चंद्रमोहन भी ससुरालियों के साथ मंदिर की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए अधिकारियों से मिल रहे थे। इसी सिलसिले में चंद्रमोहन पर पहले भी कई बार हमले हो चुके हैं। जिनमें एक मामला सूरजपुर कोतवाली में भी दर्ज है।
आरोप है कि कुछ लोगों ने चंद्रमोहन को जान से मारने की धमकी भी दी थी और ये धमकी सच साबित हुई।