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Delhi NCR News: औद्योगिक प्लॉट पर कार-बाइक शोरूम, भू-उपयोग नियमों के उल्लंघन की नुमाइश

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50 से ज्यादा प्लॉट पर औद्योगिक इकाइयों की जगह चल रहे वाहन शोरूम, सड़क पर पार्किंग से औद्योगिक सेक्टरों में लगता है जाम
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-प्राधिकरण के सामने ही उद्योग मार्ग पर नियमों की अनदेखी

योगेश तिवारी,

नोएडा। नोएडा में 50 से ज्यादा औद्योगिक प्लॉट पर कार, बाइक और स्कूटी के शोरूम चल रहे हैं। नियमों के मुताबिक वाहन शोरूम वाणिज्यिक भू-उपयोग वाले प्लॉट पर होने चाहिए, लेकिन औद्योगिक प्लॉट पर इनका संचालन खुलेआम हो रहा है। इससे एक तरफ शहर के नियोजित औद्योगिक विकास को झटका लग रहा है, वहीं दूसरी तरफ सड़क पर वाहनों की पार्किंग के कारण जाम की समस्या बढ़ रही है। बिजली, पानी-सीवर और सड़क जैसी अवस्थापना सुविधाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
औद्योगिक प्लॉट पर सबसे ज्यादा वाहन शोरूम उद्योग मार्ग पर हैं। यह मार्ग सेक्टर-1 गोलचक्कर से सेक्टर-11 झुंडपुरा तिराहे तक है। खास बात यह है कि उद्योग मार्ग के सामने ही प्राधिकरण का सेक्टर-6 दफ्तर है। जुलाई से प्राधिकरण के अधिकारी सेक्टर-96 स्थित प्रशासनिक भवन में बैठने लगे हैं, लेकिन सेक्टर-6 में अब भी वर्क सर्कल और अन्य विभागों के कार्यालय हैं। इसके अलावा सेक्टर-2, 10, 58 और 63 में भी औद्योगिक प्लॉट पर वाहन शोरूम संचालित हो रहे हैं।
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इन शोरूम की पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में वाहन सड़क पर खड़े होते हैं। इससे औद्योगिक सेक्टरों में यातायात प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को जाम में फंसना पड़ रहा है। पूर्व में सेक्टर-2 और 10 में भू-उपयोग नियमों के उल्लंघन पर प्राधिकरण ने दो शोरूम सील भी किए थे, लेकिन बाकी शोरूम पर कार्रवाई नहीं हुई।
अनदेखी का साइड इफेक्ट : प्राधिकरण के वाणिज्यिक प्लॉटों की नहीं बढ़ रही मांग
प्राधिकरण में मिश्रित भू-उपयोग नीति लागू है। इसके तहत आवासीय और औद्योगिक प्लॉट के आवंटी वाणिज्यिक उपयोग की मंजूरी ले सकते हैं। इसके लिए संबंधित सेक्टर में आवासीय, औद्योगिक और वाणिज्यिक प्लॉट की दरों के अंतर की 50 प्रतिशत धनराशि जमा करनी होती है। जनवरी में यह शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है। इसके बाद प्लॉट के क्षेत्रफल पर अनुमन्य एफएआर का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
मंजूरी से पहले प्राधिकरण आपत्ति और सुझाव भी मांगता है। नियमों के मुताबिक औद्योगिक प्लॉट पर भू-उपयोग परिवर्तन के बाद 25 प्रतिशत हिस्से में म्यूजियम, आर्ट गैलरी या शोरूम जैसी गतिविधियां ही संचालित की जा सकती हैं। वाहन शोरूम के लिए वाणिज्यिक प्लॉट का उपयोग होना चाहिए। औद्योगिक प्लॉट की दरें कम होने के कारण बिना भू-उपयोग परिवर्तन के शोरूम चलने से प्राधिकरण को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। इसका असर वाणिज्यिक प्लॉट की मांग पर भी पड़ रहा है और पिछली कई योजनाओं में यह स्थिति दिखाई दे चुकी है।
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कागजों में चल रहे उद्योग
जिन औद्योगिक प्लॉट पर कार, बाइक और स्कूटी बिक रही हैं, प्राधिकरण के रिकॉर्ड में वहां उद्योग संचालित हैं। इन प्लॉट पर औद्योगिक इकाइयों के क्रियाशील होने का प्रमाणपत्र औद्योगिक विभाग ने जारी किया है। हालांकि विभाग की ओर से जमीनी स्थिति का सत्यापन नहीं किया जा रहा है। भू-उपयोग के उल्लंघन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी नियोजन विभाग और वर्क सर्कल की है।

कोट

औद्योगिक विभाग, वर्क सर्कल व नियोजन से रिपोर्ट मांगी जाएगी। भू-उपयोग नियमों का पालन सुनिश्चित करवाया जाएगा।
-कृष्ण करुणेश, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण

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