अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. दिनेश सिंह ने बताया कि एनके चौधरी को सबसे पहले 2005 में जीभ में कैंसर हुआ था। उस दौरान लेजर तकनीकी से ट्यूमर को हटाया गया था। इसके बाद 2 वर्ष तक वे स्वस्थ रहे और लगातार मेडिकल जांच कराते रहे। साल 2007 में उन्हें गले में कैंसर की शिकायत हुई। उस दौरान डॉक्टरों ने रेडियोथैरेपी के जरिये उन्हें बचा लिया। इसके बाद 2010 में टांसिल में कैंसर हुआ, जिसे कीमो और रेडियोथैरेपी के जरिये रोका गया। इसके बाद 2014 में उन्हें कार्सिनोमा (जबड़े के पीछे) कैंसर हुआ।
इस दौरान डॉक्टरों को ऑपरेशन और रेडियोथैरेपी दी गई। इसके बाद फरवरी 2018 में उन्हें निचले होंठ पर ट्यूमर हुआ। कुछ ही समय पहले मरीज को जीभ में फिर से कैंसर की शिकायत हुई। बार बार कैंसर और रेडियोथैरेपी, कीमो देने के चलते अस्पताल के सर्जन और रेडिएशन विशेषज्ञों ने मिलकर इस मामले पर अध्ययन किया। डॉ. दिनेश सिंह का कहना है कि उन्होंने अब तक इस तरह का मामला न कभी पढ़ा है और न ही कभी देखा या सुना।
डॉ. दिनेश सिंह का कहना है कि एनके चौधरी को दोबारा फिर कैंसर होगा या नहीं? इसके बारे में कुछ नहीं कह सकते, लेकिन इतना जरूर है कि कैंसर का एक बार इलाज करा लेने के बाद नियमित जांच से बीमारी पर निगरानी रखी जा सकती है।