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टूट सकता है 5 स्टार होटल का सपना, 4 आवंटियों ने किया रिफंड के लिए आवेदन

Wed, 04 May 2016 03:33 AM IST
अरविंद सिंह/अमर उजाला, नोएडा
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शहर में 5 स्टार होटल का सपना टूटने के कगार पर पहुंच गया है। छह में से चार होटल आवंटियों ने प्राधिकरण में रिफंड के लिए आवेदन किया है। प्राधिकरण जल्द इस पर निर्णय ले सकता है। नोएडा प्राधिकरण ने फाइव स्टार होटल बनाने के लिए 2006 में जमीन आवंटित की गई थी। उस समय कुल 14 भूखंड आवंटित हुए थे।
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इन्हें औद्योगिक श्रेणी में रखते हुए करीब 7000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से आवंटन किया गया, लेकिन सरकार बदलने के बाद होटल को व्यावसायिक श्रेणी में रखते हुए 70,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर रेट तय कर दिया गया। इसका विरोध करते हुए होटल आवंटी हाईकोर्ट से स्टे ले आए। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी व्यावसायिक दरों को सही मानते हुए होटल आवंटियों को भुगतान करने का आदेश दिया। कीमत बढ़ने पर सात आवंटियों ने जमीन वापस कर दी।

सेक्टर-96 में एक होटल आवंटी ने पैसे जमा कर प्लॉट ले लिया। बाकी छह आवंटी प्राधिकरण से ब्याज व पेनाल्टी से राहत की की मांग करने लगे, लेकिन वहां से किसी तरह की राहत नहीं मिली। इन आवंटियों ने होटल न बनाने की इच्छा जाहिर करते हुए छह में से चार आवंटियों ने रिफंड के लिए आवेदन किया है। अब प्राधिकरण इन आवंटियों की तरफ से प्रीमियम के रूप में जमा रकम में से 30 फीसदी कटौती कर बाकी पैसा वापस करने पर विचार कर रहा है। वहीं, सूत्र बताते हैं कि बाकी के दो आवंटियों की तरफ से भी आवेदन जल्द आने की संभावना जताई जा रही है।
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सरेंडर की तीन वजह
जानकार मानते हैं कि होटल आवंटियों के सरेंडर की चार वजह हैं। पहली वजह यह कि मंदी के दौर में जमीन की दरें इन होटल आवंटियों को ज्यादा लग रही हैं। दूसरे, जिस समय होटलों के लिए प्लॉट आवंटित हुए थे, उस समय जेवर में एयरपोर्ट भी प्रस्तावित था। उसके बनने से होटलों को ग्राहक मिल सकते थे। वह अब भी अधर में अटका हुआ है। तीसरी वजह, प्राधिकरण ने आवासीय सेक्टरों में गेस्ट हाउस की छूट दे दी है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बिजनेस के काम से आने वाले लोग महंगे फाइव स्टार होटलों में ठहरने के बजाय इन गेस्ट हाउस में जाना पसंद करेंगे। चौथी वजह सीबीआई जांच को माना जा रहा है। आवंटी इस माहौल में होटल बनाने के पचड़े में फंसना नहीं चाह रहे।

मूल से ज्यादा ब्याज चढ़ा
रजिस्ट्री में देरी के कारण होटल आवंटनों पर मूल स्टांप से ज्यादा ब्याज लदता जा रहा है। छह आवंटियों से स्टांप शुल्क के रूप में तो करीब 54 करोड़ रुपये मिलने हैं, जबकि सालाना 18 प्रतिशत ब्याज के हिसाब से अब तक करीब 75 करोड़ रुपये से अधिक ब्याज हो चुका है। छह में से एक भी होटल आवंटी ऐसा नहीं है, जिस पर ब्याज की रकम मूल स्टांप से कम हो। रजिस्ट्री विभाग भी हाईकोर्ट से स्टे खत्म होने का इंतजार कर रहा है। इसके बाद आवंटियों को विभागीय नोटिस जारी करने की तैयारी है।
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