फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दो माह में 10 फीसदी एकेटीयू कॉलेजों ने दिए जवाब

Mon, 03 Oct 2016 01:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
विज्ञापन
विज्ञापन
एकेटीयू से शैक्षिक सत्र की मान्यता में जिन शिक्षकों को कॉलेजों का तारणहार बताकर कोर्स की मान्यता ली थी। बाद में उन्हीं प्रोफेसरों को कॉलेजों ने नौकरी से निकाल दिया गया था। 
विज्ञापन


इस पर यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों को नोटिस देकर तीन माह में जवाब देने के निर्देश दिए थे, मगर अभी तक में कुल 10 फीसदी कॉलेजों ने ही जवाब दिए हैं। इससे यूनिवर्सिटी कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना रही है, जिससे भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति ना हो।

ज्ञात हो कि 7 अक्तूबर 2015 को एकेटीयू की ओर से एक शासनादेश जारी किया था कि कोई भी कॉलेज बिना तीन माह पहले नोटिस दिए किसी भी शिक्षक को नौकरी से नहीं निकाल सकता।
विज्ञापन


यदि किसी कॉलेज को शिक्षक निकालना पड़े तो वह कारण सहित उसे बताए, मगर साल-2016 में शैक्षिक सत्र की शुरूआत में ही कॉलेजों ने शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। 

प्रदेश भर के इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के करीब 300 शिक्षकों को अचानक नौकरी से निकाल दिया गया था। इनमें से अधिकतर से बिना कारण पूछे ही नौकरी छीन ली गई। 

मजे की बात यह है कि ऐसे कॉलेजों ने उन शिक्षकों को निकाला था जिनको शैक्षिक सत्र की शुरुआत में यूनिवर्सिटी के समक्ष कॉलेज का तारणहार बताया गया था। 

इन शिक्षकों की जमकर तारीफ की गई थी, मगर कोर्स की मान्यता होने के बाद अधिकतर ऐसे ही शिक्षक बाहर कर दिए गए।इसे लेकर एकेटीयू ने प्रक्रिया को दुखद बताते हुए प्रदेश के सभी कॉलेजों को नोटिस दिया था और तीन माह में कारण सहित जवाब मांगा था कि उन्होंने शिक्षकों को क्यों निकाला।

दो माह बीतने के बाद भी अभी तक में मात्र 10 फीसदी कॉलेजों ने ही जवाब दिए हैं। यूनिवर्सिटी ने सात नवंबर तक कॉलेजों को जवाब देने के लिए मौका दिया है। इसके बाद यूनिवर्सिटी कार्रवाई करेगी।

कॉलेजों ने ऐसे शिक्षकों को बाहर निकाला है जिनका सत्यापन कोर्स की मान्यता लेते समय कराया गया था और फिर उनको बाहर कर दिया। कुछ दिनों में ऐसा क्या हुआ कि वह अच्छे से बुरे हो गए।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें