मणिपुर की आयरन लेडी शर्मिला टैगोर
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एक बड़े जन आंदोलन की नींव तैयार करने की जरूरत है। आफ्सपा (आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पॉवर एक्ट) विरोधी संघर्ष को व्यक्ति केंद्रित संघर्ष से बदलकर एक जन-आंदोलन का रूप देने के लिए भूख हड़ताल खत्म कर राजनीति में आने का फैसला किया है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने दिल्ली विश्वविद्यालय में यह बातें कहीं। नार्थ-ईस्ट फोरम फॉर इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी (नेफिस) ने शुक्रवार को डीयू के दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क में आफ्सपा और जन-आंदोलन विषय पर सेमिनार का आयोजन किया।
इस सेमिनार में मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला को मुख्य वक्ता रुप में उपस्थित थीं। अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के बाद मणिपुर के बाहर इरोम शर्मीला ने पहली बार अपना भाषण रखा।
कार्यक्रम में उन्होंने एक बड़े जन-आंदोलन की नींव तैयार करने पर जोर दिया। इस सेमिनार का आयोजन क्रांतिकारी नेता हिजाम इराबोत की 120वीं सालगिरह पर किया गया था। सेमिनार में मणिपुर से ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व से छात्रों ने शिरकत की।