राजधानी में निजी स्कूल आर्थिक पिछड़े वर्ग व वंचित वर्ग (ईडब्ल्यूएस-डीजी) के बच्चों को लॉटरी में नाम आने के बाद भी दाखिला, मुफ्त यूनिफॉर्म और किताबें देने से मना कर रहे हैं। इन शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए निदेशालय ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे स्कूल इस वर्ग के छात्रों से किताबों, यूनिफॉर्म और लिखित सामग्री के नाम पर पैसे नहीं मांग सकते। उन्हें ये सब छात्रों को मुफ्त उपलब्ध कराना होगा।
शिक्षा निदेशालय में अतिरिक्त शिक्षा निदेशक (एक्ट-1) डॉ. आशिमा जैन ने इस संबंध में स्कूलों को एक सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर में कहा गया है कि ईडब्ल्यूएस वर्ग व डीजी के लिए ड्रॉ के माध्यम से स्कूल आवंटित किए जाने के बाद ऐसे बच्चों को 15 अप्रैल तक दाखिला लेने को कहा गया है।
आवंटित स्कूल में दाखिला लेने में आ रही परेशानी की शिकायतें शिक्षा निदेशालय को मिल रही हैं। ऐसी शिकायतें भी आई हैं कि प्रवेश प्रक्रिया की औपचारिकताएं पूरी करने में स्कूल मदद नहीं कर रहे हैं। स्कूल अनुचित और तुच्छ आधार पर दाखिला देने से मना कर रहे हैं।
ऑनलाइन फॉर्म में नाम, जन्म तिथि, लिंग और आधार नंबर में गलती होने पर भी दाखिला देने से मना किया जा रहा है। आवंटित स्कूल में जो अभिभावक दाखिले के लिए रिपोर्ट कर रहे हैं, उन्हें रसीद नहीं दी जा रही। ऐसे में निदेशालय ने निजी स्कूल प्रबंधन को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि इस वर्ग के अभिभावकों से संतोषजनक तरीके से मिलें और प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी कराने में मदद करें।
वहीं, निजी स्कूलों की ओर से आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग और वंचित वर्ग के तहत आने वाले बच्चों को निशुल्क किताबें, यूनिफॉर्म और लिखित सामग्री नहीं दिए जाने को सख्ती से देखा जाएगा। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे यूनिफॉर्म और किताबों के नाम पर पैसे नहीं मांग सकते। साथ ही स्कूलों को दैनिक आधार पर 15 अप्रैल तक हुए दाखिलों के स्टेटस की जानकारी अपडेट करने को कहा गया है।