फीस बढ़ा दी, अब नेता वही जो उसको कम करवा दे
डीयू एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। इस बार कॉलेजों ने फीस बढ़ोतरी कर दी, लेकिन संसाधन नहीं बढ़ाएं हैं। विद्यार्थी ही जागरूक रहकर अपनी मांगों को छात्र नेता के सामने रखकर फीस वापसी करा सकते हैं। छात्र नेता वह किसी भी पार्टी का हो, इस समस्या को समझना चाहिए। हमारे इस मुद्दे को जो नेता आगे लेकर जाएगा हमारा वोट उसी का होगा।-अंकिता बिस्वास, बीएससी-मैथमेटिक्स, हिंदू कॉलेज
वोट वाले दिन छुट्टी ना मनाएं, अपनी बात रखें और वोट देने आएं
हमारी भी छोटी-छोटी समस्याएं हैं। हम उनके लिए लड़ते हैं। मुझे मालूम है कि यदि हम जागरूक रहें तो जमीनी स्तर पर ही काफी चीजों को सुधारा जा सकता है। दूसरी और सबसे अहम बात यह है कि भले ही डूसू चुनाव हों, छुट्टी ना मानकर वोट देने जरूर जाएं। छात्र नेता से उम्मीद तभी कर सकेंगे जब उसके समक्ष अपनी बात को सही ढंग से समाधान निकालने के लिए रख पाएंगे। राज्य व राष्ट्रीय मुद्दे के प्रति जागरूकता भी छात्रों के मुद्दे सुलझाने में मदद कर सकती है।-भारत शर्मा, एलएलबी-थर्ड ईयर, कैंपस लॉ सेंटर
ठेके वाले गुरुजी कहते हैं...आज पढ़ लो कल पता नहीं हम आएं ना आएं
हमारे यहां तो गुरुजी तक ठेके पर हैं, कहते हैं आज पढ़ लो कल का पता नहीं हम आएं या न आएं। अब आप बताओ ऐसे में हमारा क्या भविष्य होगा? हमारे यहां फीस का सबसे बड़ा मुद्दा है। फीस इतनी ली जा रही है, लेकिन उनके मुकाबले में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। डीयू का छात्र होने के बावजूद हमारे साथ सौतेला सा व्यवहार होता है। छात्र नेता से हमारी उम्मीद है कि वह हमारी समस्याओं को सुनकर उन्हें सही प्लेटफॉर्म पर रखें और उसको दूर कराएं।-प्रांशू, दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म