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दिल्ली में नहीं हो सकती सफाई, खुली MCD की पोल

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स्वच्छ भारत बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वाकांक्षी अभियान है। लेकिन इसकी हवा राजधानी दिल्ली में ही निकलती दिख रही है। कचरा प्रबंधन के लिए जिम्मेदार दिल्ली नगर निगम के पास साफ सुथरी दिल्ली के लिए दीर्घकालिक योजना नहीं है।
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वहीं, वार्षिक योजनाएं भी कारगर नहीं हैं। इसका खुलासा नियंत्रक महालेखा परीक्षक की वित्तीय वर्ष 2013-14 की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ। इसमें दिल्ली सरकार की भी कई स्तर पर खामियां उजागर हुईं।

मंगलवार को सीएजी रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखी गई। वहीं, अकाउंटेंट जनरल डॉली चक्रवर्ती ने मीडिया को इसकी विस्तार से जानकारी दी।

जमीन न होने से अटका पड़ा काम

रिपोर्ट के मुताबिक, डोर टू डोर कचरा इकट्ठा करने का काम सिर्फ उत्तरी नगर निगम के दो जोन में चल रहा है। बाकी जोन में इसके लिए अस्थायी इंतजाम हैं। वहीं, कचरे का पृथक्करण भी बेहद लचर है।

पूर्वी एमसीडी, एनडीएमसी व डीसीबी में 2013-14 में इस पर कोई काम नहीं हुआ। जबकि उत्तरी एमसीडी में 57 फीसदी व दक्षिणी एमसीडी में सिर्फ 17 फीसदी कचरा ही अलग किया जा सका।

गाजीपुर, भलसवा व ओखला के कचरा निपटान संयंत्र की क्षमता सिर्फ 2,929 टन है। जबकि दिल्ली से रोजाना 7,172 टन कचरा निकलता है। इतना ही नहीं, जमीन न होने से न तो नए लैंडफिल बन सके हैं न ही कोई प्लांट लग सका।

दिल्ली में इसके लिए 600 एकड़ जमीन की जरूरत है। लेकिन डीडीए ने 324 एकड़ जमीन दी। इसमें से सिर्फ 150 एकड़ पर ही लैंडफिल बन सकता है।

बिना काम पीआरटी पर 10 करोड़ खर्च

एमसीडी सफाई के दैनिक कामों को भी पूरा नहीं कर पाई। सड़कों पर झाड़ू लगाने, नालों से गाद व शौचालयों की सफाई की निगरानी का कोई इंतजाम नहीं है।

फिर, करीब 23 करोड़ रुपये खर्च के बावजूद आम लोगों के लिए शौचालयों का इंतजाम नहीं हो सका। दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने प्रबंधन में खामियों के चलते सरकार का खजाना खाली करने के साथ जनता की जेब भी खाली की है।

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में बताया की दो अलग-अलग मामलों में परिवहन विभाग के मिस मैनेजमेंट से करोड़ों रुपये खर्च हो गया। मगर जमीन पर आज तक कुछ नजर नहीं आया। विभाग ने उस पर काम करने की भी जरूरत नहीं समझी।

रिपोर्ट के मुताबिक परिवहन विभाग ने पर्सनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (पीआरटी) को आगे बढ़ाने के लिए दो चरणों में फिजिबिलटी रिपोर्ट तैयार करवाई। इस पर कुल 9.85 करोड़ रुपये खर्च किए गए। मगर आज तक इस पर कोई काम नहीं हुआ।
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डिम्ट्स ने भी पैसे लेकर नहीं किया काम

रिपोर्ट के मुताबिक विभाग ने डिम्ट्स (दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम लिमिटेड) के एक प्रस्ताव को 2009 में मंजूरी दी। वसंत कुंज, वसंत विहार और मुनिरका में पीआरटी के लिए मंजूरी दे दी।

मई 2009 में 1.63 करोड़ भी जारी कर दिए गए। डिम्ट्स ने अप्रैल 2010 में अपनी रिपोर्ट दी। मगर परिवहन विभाग ने इस पर कोई आगे काम नहीं किया।

पहली रिपोर्ट पर बिना काम हुए फिर डिम्ट्स ने दोबारा मई 2011 में द्वारका सब सिटी, नॉर्थ कैंपस, आईटीपीओ, करोल बाग और ईस्ट दिल्ली लिंक टू मध्य दिल्ली को लेकर एक और पीआरटी की फिजिबिलिटी स्टडी के लिए प्रस्ताव रखा।

विभाग ने बिना पिछली रिपोर्ट को संज्ञान में लिए दोबारा मंजूरी दे दी। इस बार 7.45 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए। इस बार रिपोर्ट मार्च 2013 में आई मगर आगे कोई काम नहीं हुआ। इस रकम पर कुल 77 लाख रुपये का सर्विस टैक्स भी विभाग ने दिया।
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