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जामा मस्जिद पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिली, पुलिस ने इमामों से मिलकर की शांति की कोशिश

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 20 Dec 2019 11:22 AM IST

सार

  • दिल्ली की सभी प्रमुख मस्जिद के इमामों से मिलकर पुलिस ने शांति बनाये रखने के प्रयास किये  
  • सभी अहम इलाकों में अभी भी पुलिस तैनात
  • शुक्रवार को अहम मानते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की
  • अभी सभी मेट्रो स्टेशन चालू रखे गये
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- फोटो : पीटीआई

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के विरोध में जामा मस्जिद पर होने वाले विशाल प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस की इजाजत नहीं मिली है। इस कारण इस विरोध प्रदर्शन को टालना पड़ा है।

जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक विशाल मार्च निकालने की योजना भी स्थगित कर दी गई है। लेकिन प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर इकट्ठे होकर नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कर सकते हैं।



गुरुवार को भी लालकिला और जामा मस्जिद के आसपास धारा 144 लगाई गई थी। इसके बाद भी भारी संख्या में प्रदर्शनकारी जामा मस्जिद के आसपास पहुंच गए और प्रदर्शन किया। हालांकि, ‘हम भारत के लोग’ के नाम से जामा मस्जिद से दरिया गंज के पास शहीदी पार्क तक निकाले जाने वाले मार्च को पुलिस की सख्ती के कारण टालना पड़ गया था।
 
दरअसल, प्रदर्शनकारियों की योजना थी कि शुक्रवार को जामा मस्जिद के पास भारी संख्या में इकट्ठे होंगे और हाथों में भारत के संविधान की प्रतियां लेकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ेंगे।

इसके बाद संविधान की प्रतियां हाथ में लेकर जामा मस्जिद से दरियागंज, दिल्ली गेट, आईटीओ, बाराखम्भा होते हुए जंतर-मंतर तक पहुंचने की योजना थी। फिलहाल इस योजना को पुलिस की इजाजत न मिलने के कारण टालना पड़ा है। इस प्रदर्शन में मुस्लिम समाज के कई शीर्ष नेता भी शामिल होने वाले थे। 

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- फोटो : पीटीआई
नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के विरोध में जामा मस्जिद पर होने वाले विशाल प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस की इजाजत नहीं मिली है। इस कारण इस विरोध प्रदर्शन को टालना पड़ा है।

जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक विशाल मार्च निकालने की योजना भी स्थगित कर दी गई है। लेकिन प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर इकट्ठे होकर नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कर सकते हैं।

गुरुवार को भी लालकिला और जामा मस्जिद के आसपास धारा 144 लगाई गई थी। इसके बाद भी भारी संख्या में प्रदर्शनकारी जामा मस्जिद के आसपास पहुंच गए और प्रदर्शन किया। हालांकि, ‘हम भारत के लोग’ के नाम से जामा मस्जिद से दरिया गंज के पास शहीदी पार्क तक निकाले जाने वाले मार्च को पुलिस की सख्ती के कारण टालना पड़ गया था।
 
दरअसल, प्रदर्शनकारियों की योजना थी कि शुक्रवार को जामा मस्जिद के पास भारी संख्या में इकट्ठे होंगे और हाथों में भारत के संविधान की प्रतियां लेकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ेंगे।

इसके बाद संविधान की प्रतियां हाथ में लेकर जामा मस्जिद से दरियागंज, दिल्ली गेट, आईटीओ, बाराखम्भा होते हुए जंतर-मंतर तक पहुंचने की योजना थी। फिलहाल इस योजना को पुलिस की इजाजत न मिलने के कारण टालना पड़ा है। इस प्रदर्शन में मुस्लिम समाज के कई शीर्ष नेता भी शामिल होने वाले थे। 

पुलिस ने की शांति की अपील

दिल्ली पुलिस ने सभी लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी अफवाह को सच न मानने की अपील की है। इसी कारण कई इलाकों में इंटरनेट पर पाबंदी भी लगा दी गई है। पुलिस ने दिल्ली की सभी मस्जिदों के इमामों से मिलकर शांति बनाए रखने में उनका सहयोग मांगा है।

जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने भी शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह से दूर रहने की भी अपील की है। उन्होंने कहा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी किसी भी मुस्लिम के अधिकारों को कम नहीं करता और इससे किसी को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। इसके पहले जामिया नगर के मस्जिदों के इमामों के साथ भी दिल्ली पुलिस ने मीटिंग कर शांति बनाए रखने की कोशिश की थी। 

दरअसल, शांति बनाए रखने के मामले में मस्जिदों के इमामों का सहयोग बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि सीलमपुर-जाफराबाद में हुई हिंसा के बाद कुछ लोगों ने यह आरोप लगाया था कि एक मस्जिद से इस तरह के प्रदर्शन की अपील की गई थी।

हालांकि, पुलिस ने हिंसा के बाद जिन भी लोगों को गिरफ्तार किया था, वे सभी पेशेवर अपराध से जुड़े लोग पाए गए थे। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों के बीच घुसकर अराजक तत्त्वों ने शहर की शांति भंग करने की कोशिश की थी। इस हिंसा में पुलिस चौकी और कई वाहनों को आग लगा दी गई थी और पुलिस बल पर पत्थरबाजी की गई थी। 

दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी एमस रंधावा ने जामिया और सीलमपुर हिंसा के बाद शहर में शांति होने का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि शुरूआती दौर की हिंसा के बाद अब शहर में पूरी तरह शांति है। शांति बनाए रखने के लिए ही शहर के लगभग 1200 लोगों को एहतियातन हिरासत में ले लिया गया था, हालांकि गुरुवार शाम को इनमें से ज्यादातर को छोड़ दिया गया था।
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