दिल्ली विधानसभा की तीन सीटों पर उपचुनाव की घोषणा होते ही भारतीय जनता पार्टी में मंथन शुरू हो गया है। पार्टी के लिए यह चुनाव लिटमस टेस्ट की तरह होगा। राजनीति के जानकार उपचुनाव की घोषणा के बाद कई मायने निकाल रहे है।
तर्क यह दिया जा रहा है कि तीनों सीट पर अगर भाजपा जीती तो फिर आलाकमान तय करेगा कि चुनाव कराएं या फिर सरकार बनाए। वहीं भाजपा के ही कुछ नेताओं का कहना है कि अगर तीनों सीटों पर पार्टी जीत हासिल करती है तो फिर सरकार बना लेने से गुरेज नहीं करना चाहिए। सूबे में सरकार बनाने के पक्षधरों का यह भी मानना है कि महरौली विधानसभा सीट को छोड़ दी जाए तो अन्य दोनों विधानसभा (कृष्णानगर और तुगलकाबाद) भाजपा की परंपरागत सीट हैं।
वहीं भाजपा में ही एक पक्ष मजबूती के साथ कह रहा है कि चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में रहे तो विधानसभा भंग कर एक साथ चुनाव हो जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर अभी भी दिल्ली में है लिहाजा बहुमत से ज्यादा आंकड़ा लाना बेहद ही आसान होगा।