बुलंदशहर में पुलिस की लापरवाही से मां-बेटी के साथ गैंगरेप की घटना को बदमाश अंजाम दे गए। इस तरह की घटना का प्रयास कुछ माह पहले ही यमुना एक्सप्रेस वे पर एक्सल गिरोह के बदमाशों ने किया था।
मगर वह दंपति की जिद के कारण असफल हो गए थे। यदि जिले की पुलिस अभी भी सचेत न हुई तो किसी भी दिन इस तरह की घटना को बदमाश अंजाम दे सकते हैं।
बता दें कि शनिवार रात को खोड़ा के एक परिवार के साथ बुलंदशहर में लूट और मां-बेटी के साथ गैंगरेप की घटना को बदमाशों ने अंजाम दिया था। घटना के पीछे पुलिस की लापरवाही मानी जा रही है।
यदि गश्त करते हुए पुलिस उधर आ जाती तो घटना न होती। इसी तरह नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई ऐसी मुख्य सड़कें हैं, जिन्हें लोग रात में सुरक्षित मानते हैं। जबकि रात की बात तो दूर वह सड़कें दिन में भी सुरक्षित नहीं हैं।
क्या हुआ था चार माह पहले
यमुना एक्सप्रेस वे पर करीब चार माह पहले एक्सल गिरोह ने बुलंदशहर जैसी घटना को अंजाम देने का प्रयास किया था। बदमाशों ने दंपति की कार को रोककर उनकी 22 साल की बेटी का अपहरण कर एक्सप्रेस वे से नीचे ले जाने लगे, लेकिन दंपति ने ट्रक के सामने कूदकर लोगों को एकत्र करने की धमकी दी तो बदमाश युवती को छोड़कर भाग गए।
दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती पुलिस पीसीआर
पुलिस
- फोटो : file photo
इससे वह घटना होने से बाल-बाल बच गई। आमतौर पर एक्सप्रेस वे पर पुलिस की गश्त दिखाई नहीं देती है। वहीं 2009 में इस एक्सप्रेस वे को चालू करते समय जेपी और पुलिस ने संयुक्त रूप से गश्त करने का दावा किया था।
10 बजे के बाद ये सड़कें हैं खतरनाक
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे, दादरी-नोएडा रोड और ग्रेनो वेस्ट का 130 मीटर रोड भी रात 10 बजे के बाद खतरनाक हो जाता है। इन सड़कों पर रात में दूर-दूर तक पुलिस पीसीआर दिखाई नहीं देती है।
जबकि दादरी और ग्रेनो को जोड़ने वाले कई संपर्क मार्ग भी इसी तरह खतरनाक हैं। यहां पर पुलिस दिखाई नहीं देती है। इसी तरह नोएडा के छिजारसी रोड, गौर सिटी से एनएच-24 के अलावा सेक्टर-62 क्षेत्र, सेक्टर-100, समेत कई सेक्टर भी पुलिस की गश्त से अछूते हैं।
पुलिस की गश्त की खुली पोल
नोएडा के सेक्टर-62 में 22 जुलाई की रात इंजीनियर शैलेंद्र की हत्या कर दी गई थी लेकिन सुबह तक पुलिस की पीसीआर गश्त के लिए नहीं आई। इससे साफ्टवेयर इंजीनियर की हत्या की जानकारी भी सुबह ही हो पाई थी। परिजन इस घटना को लूट के इरादे से हत्या किए जाने की बात कह रहे हैं, मगर पुलिस अपनी कहानी गढ़ रही है।