ई-बुक्स के दौर भी किताबों खरीदकर पढ़ने का प्रेम अभी कम नहीं हुआ है। रविवार को दिल्ली पुस्तक मेले में पहुंची भीड़ कम से कम यहीं बयां कर रही थी।
बुजुर्ग हो या महिला, युवा हो या दस साल तक के बच्चे हर वर्ग पुस्तक मेले में अपने मतलब की चीज तलाशते नजर आ रहे थे। कोई कहानी खरीद रहा तो कोई कैरियर से जुड़ी किताबें तो युवा अपने लिए ऑटोबायोग्राफी पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे।
पुस्तक मेले में रविवार छुट्टी वाला दिन होने के कारण हाउसफुल रहा। पुस्तक मेले में सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं की किताबों भी उपलब्ध है। यही नहीं फ्रेंच जर्मन बुक स्टोर भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।