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सस्ते नौकर की चाह में बढ़ा रहे बंधुआ मजदूरी

Sat, 20 Sep 2014 03:45 AM IST
राहुल श्याम/अमर उजाला, फरीदाबाद
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बंधुआ मजदूरी समाज के लिए अभिशाप है। सरकार व प्रशासन द्वारा समाज को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराने के लाख दावों के बाद भी स्थिति में अधिक सुधार नहीं आया है।
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कोठियों में रहने वाला अमीर वर्ग सस्ते नौकरों की चाह में बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है। असम, गुवाहाटी, पूर्वोत्तर राज्यों, मध्य प्रदेश, बिहार आदि राज्यों के पिछड़े इलाकों से बच्चों व नाबालिगों को लाकर घरों में बंधुआ मजदूरी कराई जा रही है।

औद्योगिक शहर में प्रशासन की नाक के नीचे 100 से अधिक घरों में बंधुआ मजदूर काम कर रहे हैं। यह खुलासा बंधुआ मजदूरी खत्म करने के लिए काम कर रही संस्था ‘बंधुआ मुक्ति मोर्चा’ के सर्वे में सामने आया है। संस्था इन आंकड़ों के आधार पर पुलिस के साथ मिलकर अभियान चलाएगी।
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पलवल है अव्वल
संस्था के मुताबिक, 10 से 14 साल तक के बच्चे, नाबालिग लड़के-लड़कियां व 18-20 साल की युवतियां भी बंधुआ मजदूरी करने को मजबूर हैं। संस्था के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर निर्मल गौराना के मुताबिक, उनकी संस्था द्वारा हरियाणा के कई शहरों सहित फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पलवल आदि जगहों पर सर्वे कराया गया था।

गौराना ने बताया कि छोटे-बड़े शहरों में संस्था के वालेंटियर्स मौजूद हैं। फरवरी-मई 2014 के ही आंकड़ों को लें, तो फरीदाबाद, बल्लभगढ़, पलवल व आसपास के कुछ स्थानों में करीब 100 से भी अधिक बंधुआ मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें से पलवल में सबसे अधिक करीब 75 मजदूरों की चौंकाने वाली संख्या सामने आई है। संस्था ने करीब दो माह पहले पानीपत से भी 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया था।

जुटाते रहते हैं सूचनाएं
बंधुआ मुक्ति मोर्चा व उसके जैसे कई अन्य संगठन भी हैं, जो लगातार नजर बनाए रखते हुए बंधुआ मजदूरों की सूचनाएं जुटाते रहते हैं। यह संगठन पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही पुलिस की टीम को लेकर छापा मारते हैं। फरीदाबाद व आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही बंधुआ मजदूरों की संख्या को लेकर यह संगठन गंभीरता बनाए हुए हैं।

दो लड़कियों को छुड़वाया
बंधुआ मुक्ति मोर्चा एवं शहरी महिला कामगार यूनियन ने 14 सितंबर की रात को सेक्टर-21सी में बने ओनेक्स टावर में एक घर से दो बंधुआ मजदूर लड़कियों को मुक्त कराया था। निर्मल गोराना ने खुलासा किया था कि इन लड़कियों को असम से लाकर यहां बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी।
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