प्रशांत विहार में बंसीवाला स्वीट्स और सीआरपीएफ स्कूल के पास हुए धमाकों में बेंजोइल पेरोक्साइड यानी ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। पाउडर के साथ कुछ और रसायन भी मिलाए गए हैं, लेकिन इनका रोहिणी स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भी अभी तक पता नहीं लगा पाई है।
एफएसएल ने प्रशांत विहार में 20 अक्तूबर को हुए धमाके की अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है। एफएसएल ने पुलिस अधिकारियों को अनौपचारिक रूप से बताया है कि दोनों धमाकों के लिए बेंजोइल पेरोक्साइड का इस्तेमाल किया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), एनएसजी और दिल्ली पुलिस अधिकारियों का भी शुरुआती जांच के बाद यही कहना है। सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी शुरुआती जांच में इसे आतंकी वारदात नहीं मान रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ब्लीचिंग पाउडर आज तक आतंकी वारदात या फिर बम धमाकों में इस्तेमाल नहीं किया गया है। ऐसे में या तो कोई वेस्ट सामान फेंक रहा है या फिर शरारत की जा रही है। स्पेशल सेल के अधिकारियों का कहना है कि सीआरपीएफ स्कूल की चहारदीवारी के पास पहला धमाका हुआ था। इसके नमूने विधि विज्ञान प्रयोगशाला के प्रशांत विहार स्थित वीरा सेंटर में जांच के लिए भेजे गए थे। एक महीने से ज्यादा समय बीतने के बावजूद रिपोर्ट नहीं मिली है।
प्रयोगशाला के अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से बताया है कि धमाके में इस्तेमाल किया गया पाउडर बेंजोइल पेरोक्साइड है। ये कपड़े व पनीर धोने, महिलाओं के कॉस्मेटिक सामान और सॉफ्टटॉय बनाने में इस्तेमाल होता है। वहीं, दूसरे धमाके वाली जगह से भी पाउडर के नमूने उठाए गए हैं। अगर ये आतंकी वारदात होती तो धमाका भीड़ वाली जगह पर किया जाता। पिछली बार की तरह इस बार भी धमाका दीवार की बगल में कूड़ा फेंकने वाली जगह पर हुआ है।
अभी तक कोई सुराग नहीं
एनआईए के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार मौके से दोनों जगहों से पाउडर के अलावा कुछ नहीं मिला है। आशंका है कि इस पाउडर पर सिगरेट या अन्य ज्वलनशील पदार्थ फेंका गया जिससे धमाका हो गया या फिर पाउडर में कोई ऐसा रसायन मिला गया है जिससे किसी तरह की प्रतिक्रिया होने पर धमाका हो गया। पुलिस को मौके से कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं मिला है।