कालेधन का काला कारोबार करने वालों की कमेटी (हर माह सदस्यों से निश्चित राशि लेना और एक को देना) बंद हो रही हैं। कमेटी संचालकों ने अपने सदस्यों से पैसा लेना बंद कर दिया है। कोई दो माह की वेंटिग बता रहा है तो कोई अपने सदस्यों को बुला कर लेनदारी व देनदारी तय कर रहा है। आलम यह है कि कमेटी खेलने वालों की मौज है तो संचालक घाटे में दिख रहे हैं।
गुरुग्राम में काला धन लगाने वालों की कमी नहीं है। बैंक के समानांतर एक व्यवस्था चल रही है। जिसे कमेटी कहते हैं। इसमें एक व्यक्ति संचालक होता है। जो 10 से 15 सदस्यों को साथ रख कर एक निर्धारित रकम की किस्त लेता है। माह में एक बार निर्धारित किस्त जमा की जाती है और उसे आवश्यकतानुसार सदस्य बोली बोल कर लेता है। कमेटी संचालकों ने अपने सदस्यों से पुराना नोट लेना बंद कर दिया है और उसे दो माह के लिए होल्ड पर डाल दिया है।
कुछ संचालक तो अपने सदस्यों को बुला कर अब तक लेन-देन देखकर हिसाब कर रहे हैं। संचालकों की मानें तो छोटा नुकसान ठीक है आगे बड़ा नुकसान हो सकता है। पूरे गुरुग्राम में मदनपुरी की ंएक रजिस्टर्ड फर्म बतायी जाती है। बाकी सब लोग अवैध कारोबार करते हैं। कुछ चिट-फंड कंपनियां दिल्ली में रजिस्टर्ड हैं। जिन्होंने अपना जाल गुरुग्राम में बिछा रखा है। बताते हैं कि गुरुग्राम में ऐसी कमेटी हैं जो करोड़ से ज्यादा एकत्रित करती हैं। एक कमेटी तो ऐसी है जो हर माह थाइलैंड में खुलती थी। गुरुग्राम में इसका एक माह में 1500 करोड़ का कारोबार था।
बड़े नोट बंद होने के बाद कमेटी के कारोबार पर असर पड़ेगा। इससे होने वाली अपराध पर रोक लगेगी। -सुमित कुमार डीसीपी अपराध गुड़गांव।