देश में सत्ता बदली और चेहरे भी बदल गए लेकिन अगर कुछ नहीं बदला है तो वो है नेताओं की बेतुकी बयानबाजी का तरीका। सरकार चाहे जिसकी हो सत्ता में आते ही नेताओं की जुबान अपने आप फिसलने लगती है।
मौजूदा हालात में अगर देखा जाए तो पूरे देश की जनता महंगाई से त्रस्त है और लगातार इसके खिलाफ आवाज भी उठा रही है।
वहीं, केंद्र सरकार के नेता इस पर कोई ठोस रणनीति बनाने या लोगों को राहत देने के बजाय अपनी बेतुकी बयानबाजी से आम जनता के जले पर नमक छिड़क रहे हैं।