भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व एक तरफ नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने की मुहिम में जुटा है तो वहीं प्रदेश भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर पशोपेश में है।
पार्टी को कोर्ट के उस सवाल का जवाब ढूंढे नहीं मिल रहा है, जिसमें पूछा गया है कि क्या वे (कांग्रेस और भाजपा) आपस में मिलकर दिल्ली में सरकार बनाने की संभावना तलाश करना चाहते हैं।
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पार्टी के सामने उलझन यह है कि अगर ‘हां’ में जवाब दिया तब भी मुश्किल और ‘ना’ में जवाब दिया तो एक चुनाव और झेलना होगा। उधर, भाजपा विधायक भी आम आदमी पार्टी के दिल्ली में प्रभाव की वजह से चुनाव नहीं चाह रहे हैं।
पार्टी को यह डर भी सता रहा है कि अगर फिर से विधानसभा चुनाव हुए तो 32 सीटें लाना मुश्किल साबित हो सकता है। इसी डर से भाजपा अपने विधायकों को लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं देने पर अपना रुख साफ नहीं कर रही है। क्योंकि अगर सरकार बनानी पड़ी तो संख्या जुटाना भारी पड़ेगा।
पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि आम आदमी पार्टी का जोर भले ही पूरे देश में नहीं है, लेकिन दिल्ली में उसकी स्थिति मजबूत है। उधर, भाजपा 31 मार्च तक जवाब तैयार करने के लिए लीगल सेल के संपर्क में है। लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी की घोषणा के बाद इसका जवाब तैयार करने के लिए लीगल सेल, भाजपा के राष्ट्रीय नेता अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद से सलाह लेगा।