मुख्यमंत्री ने तीनों नगर निगम में नेतृत्व कर रहे भाजपा के वरिष्ठ पार्षदों की एक समीक्षा बैठक बुलाकर झटका दे दिया है। खास बात यह है कि भाजपा के वरिष्ठ पार्षदों को अभी इस तरह की किसी बैठक की उम्मीद नहीं थी।
दरअसल, इस बैठक में नगर निगम के कामों की समीक्षा की जाएगी, जिसमें गलत पाए जाने पर कार्रवाई भी हो सकती है। केजरीवाल के इस निर्णय से तीनों नगर निगम में विपक्ष के नेता व कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद काफी गदगद है।
मुख्यमंत्री ने तीनों नगर निगम में विपक्ष के नेताओं को महत्व देने के संबंध में ऐसा निर्णय लिया है, जिसे लेने की कभी पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भी जरूरत नहीं समझी थी।
सूत्रों के अनुसार गत दिनों दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में सदन के नेता और भाजपा के वरिष्ठ पार्षद सुभाष आर्य ने तीनों नगर निगम के दिल्ली सरकार से जुड़े विभिन्न मसलों पर बातचीत के लिए मुख्यमंत्री से समय मांगा था।
उन्होंने पत्र के माध्यम से बताया था कि तीनों नगर निगम के मेयर, सदन के नेता, स्थाई समिति के अध्यक्ष अपनी-अपनी नगर निगम के आयुक्तों के साथ मुख्यमंत्री से मिलेंगे। सूत्रों ने बताया कि केजरीवाल ने 29 जनवरी को मिलने के लिए उन्हें न्योता भेज दिया है।
साथ ही तीनों नगर निगम में विपक्ष के नेता व कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षदों को भी बैठक में आमंत्रित कर दिया है। इस संबंध में भाजपा के वरिष्ठ पार्षदों को कोई सूचना नहीं दी गई है, लेकिन कांग्रेस के पार्षद खुश हैं।
बता दें कि एकीकृत नगर निगम और नगर निगम के तीन हिस्से होने के बाद उनकी अगुवाई करने वाले भाजपा पार्षद निरंतर शीला दीक्षित और शहरी विकास विभाग संभालने वाले मंत्री से मिलते थे, मगर वे विपक्ष के नेताओं को अपने साथ लेकर नहीं गए थे।
इतना ही नहीं शीला दीक्षित और उनके सहयोगी मंत्री ने कभी भी अपनी पार्टी के पार्षद दल के नेता व नगर निगम में विपक्ष के नेताओं को बैठकों में नहीं बुलाया था। एकीकृत नगर निगम में विपक्ष के नेता रहे जय किशन शर्मा ने एक बार तो इस संबंध में शीला दीक्षित व डॉ. एके वालिया को पत्र लिखकर नाराजगी भी जताई थी।
सरकार पर वोट की राजनीति करने का आरोप
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में सदन के नेता सुभाष आर्य ने अनुबंध कर्मियों को नियमित करने के लिए गठित की उच्च कमेटी को जनता को गुमराह करने की राजनीतिक चाल करार दिया है। उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए दिल्ली सरकार लोक लुभावनी घोषणाएं और वादे कर रही हैं। 13 सदस्यीय उच्च कमेटी का गठन इसी का परिणाम है। उन्होंने दिल्ली सरकार पर वोट की राजनीति करने का आरोप लगाया।