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हरियाणा चुनाव: चेहरे वही, बस झंडे बदले

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उसूलों की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस एवं इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को दूसरे दलों के बागियों से कोई परहेज नहीं है।
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तीनों को एक दूसरे के बागी नेता राजनीतिक बिसात में जिताऊ मोहरे की तरह नजर आ रहे हैं। पिछले लगभग एक माह में बहुत तेजी से राजनीतिक आस्था बदलने का काम हुआ है। मतलब चेहरे वही हैं लेकिन चुनाव के सिंबल बदल गए।

जो कल तक भाजपा की कसमें खाते हुए नहीं थकते थे। अपने आपको पार्टी का कर्मठ सिपाही बताते थे, उनकी आस्था अचानक ऐसी बदली कि झंडे का रंग ही बदल गया। पंजा कमल में बदल गया और कमल चश्मे में।
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रंग बदलते नेताओं से जनता परेशान

रंग बदलते नेताओं को देखकर जनता परेशान है कि जब नेताजी अपनी पार्टी के न हुए तो वे जनता के क्या होंगे। कांग्रेस से भाजपा में आए एक नेता बताने लगे कि उनके आरएसएस से कितने पुराने रिश्ते हैं। तो भाजपा छोड़कर इनेलो में आए नेता बताने लगे कि उनकी तो ताऊ से अच्छी थी।

कांग्रेस में अब तक प्रत्याशी घोषित नहीं हुए हैं इसलिए इसमें अभी बागियों के पैदा होने का इंतजार है।

खास बात यह है कि सत्ता के लालची ये दलबदलू कभी नए लोगों को उभरने नहीं देते। पार्टियां भी उनके कथित जनाधार को देखते हुए टिकट दे देती हैं।

राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता रहे राजेंद्र चोपड़ा का कहना है कि आज की राजनीति में सत्ता लोलुपता बढ़ गई है। नेताओं के आदर्श नहीं हैं। काडर बेस पार्टी का नेता भी अचानक दूसरी विचारधारा शामिल हो जा रहा है।
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ये रही आयाराम-गयाराम की लिस्ट

-होडल के इनेलो नेता रामरतन (पूर्व विधायक) भाजपा में आए और उन्हें टिकट मिल गई।
-हथीन के कांग्रेस नेता हर्ष कुमार (पूर्व मंत्री) भाजपा में आए और उन्हें टिकट मिल गई।
-पलवल के इनेलो नेता सुभाष कत्याल (पूर्व मंत्री) भाजपा में आए, हालांकि उन्हें टिकट नहीं मिली है।
-तिगांव से टिकट न मिलने पर इनेलो नेता बीरपाल गुर्जर निर्दलीय मैदान में हैं।
-फरीदाबाद शहरी से टिकट न मिलने पर भाजपा नेता प्रवेश मेहता ने इनेलो का दामन थामा।
-बड़खल से टिकट न मिलने पर भाजपा नेता चंदर भाटिया (पूर्व विधायक) इनेलो से मैदान में उतरे।
-बसपा से आम आदमी पार्टी में आए नेता जगन डागर ने टिकट के लिए कांग्रेस का दामन थामा।

संभावना:
पूर्व मंत्री एसी चौधरी बड़खल से टिकट न मिलने पर बगावत कर सकते हैं। इसकी धमकी उन्होंने पार्टी को दे दी है।
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