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बहुमत के बाद भी MCD में BJP को इस वजह से काम करने में होगी दिक्कत

Sun, 30 Apr 2017 09:01 AM IST
विनोद डबास/अमर उजाला, नई दिल्ली
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DELHI BJP
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दिल्ली के तीनों नगर निगम के चुनाव में भाजपा ने भले ही जीत का परचम लहरा दिया है, लेकिन निगम सदन को चलाना इतना आसान नहीं होगा। अनुभव के मामले में उसके पार्षद विपक्षी दलों के पार्षदों के सामने बौने दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि हाल ही में जीते उसके पार्षदों में से एक भी पार्षद निवर्तमान सदन में सदस्य नहीं था। इतना ही नहीं, उसके नौ पार्षद ऐसे हैं जो दोबारा नगर निगम में आए हैं। ये पार्षद एकीकृत नगर निगम में सदस्य रहे हैं।      
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भाजपा के पार्षदों में शामिल पुराने नौ पार्षद अपने पहले कार्यकाल के दौरान एकीकृत नगर निगम में किसी भी महत्वपूर्ण पद पर नहीं रहे थे। इसके अलावा पिछले पांच साल के दौरान उनका नगर निगम से कोई वास्ता नहीं रहा। 

पिछले पांच साल में नगर निगम की कार्यशैली में काफी परिवर्तन हो चुका है। ये नौ पार्षद भी एक तरह से नए पार्षदों जैसे ही हैं। इस तरह तीनों नगर निगम में भाजपा के पास अनुभवी पार्षदों का अकाल है। इस कारण भाजपा के लिए तीनों नगर निगम को चलाने में भारी दिक्कत आने की संभावना है।  
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उधर, तीनों निगम में कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी एवं अन्य दलों के 17 पार्षद पिछले सदन में भी सदस्य थे और वह भाजपा के पिछले पांच साल के कामकाज से पूरी से वाकिफ हैं। इस तरह वह छोटी-छोटी बातों पर भाजपा के पार्षदों को आसानी से घेर लेंगे। पिछले सदन में भी इन पार्षदों ने कई बार भाजपा के समक्ष दिक्कत पैदा की थी।
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उत्तरी दिल्ली नगर निगम में बीजेपी के सिर्फ 3 अनुभवी पार्षद

mcd election
उत्तरी दिल्ली नगर निगम में भाजपा के 64 पार्षदों में से मात्र तीन पार्षद ऐसे हैं जो पहले पार्षद रह चुके हैं। इस नगर निगम में कांग्रेस के 15 पार्षदों में चार और आम आदमी पार्टी के 21 में से दो निवर्तमान पार्षद हैं। इसी तरह दक्षिण दिल्ली नगर निगम में भाजपा के 70 पार्षदों में से केवल चार पार्षदों को ही नगर निगम का अनुभव है, वहीं कांग्रेस के 12 पार्षदों में पांच पार्षद पिछले सदन में भी सदस्य थे, जबकि आप के 16 पार्षदों में दो पार्षद भी पिछले बार भी पार्षद थे। 

इस नगर निगम में इंडियन नेशनल लोकदल के एक और एक निर्दलीय पार्षद भी लगातार दूसरी ओर पार्षद बने हैं। पूर्वी दिल्ली नगर निगम में भाजपा के पार्षदों में दो पार्षद एकीकृत नगर निगम में सदस्य थे। जबकि कांग्रेस के तीन पार्षदों में दो पार्षद पिछले बार भी पार्षद थे।     
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