नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद दिल्ली में अब चुनाव प्रचार का बिगुल बज गया है। राजनीतिक दल पोस्टर, होर्डिंग्स, ऑडियो-वीडियो, रेडियो जिंगल से लेकर यू ट्यूब और सोशल मीडिया के सभी माध्यमों से मतदाताओं तक पहुंचाने की जुगत में लगे हैं। दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक इन सब माध्यम से प्रचार करने में कांग्रेस सबसे पीछे नजर आ रही है।
दरअसल चुनाव आयोग का निर्देश है कि किसी भी चुनाव सामग्री को किसी भी माध्यम पर ले जाने से पहले उसकी मंजूरी लेनी होगी। इसके लिए राज्य स्तर पर एक मीडिया सर्टिफिकेशन व मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) बनाई गई है। चुनाव घोषणा के बाद कमेटी को राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव प्रचार के आवेदन लगातार मिल रहे हैं। घोषणा के 10 दिनों में कमेटी को कुल 80 आवेदन मिल चुके हैं।
बीजेपी की ओर से कुल 56 आवेदन मिले हैं जिसमें एक को रिजेक्ट कर दिया गया है। इसी तरह आम आदमी पार्टी की ओर से 23 आवेदन मिल चुके है जिसमें 6 को रिजेक्ट किया गया है अन्य को मंजूरी मिली है। वहीं कांग्रेस इसमें सबसे पीछे है। पार्टी की ओर से अभी तक सिर्फ एक आवेदन की पार्टी की ओर से मिला है जिसे मंजूरी मिल चुकी है।
सरकारी कर्मचारी शब्द पर आपत्ति
एमसीएमसी कमेटी ने आम आदमी पार्टी के एक ऐसे विज्ञापन को रिजेक्ट कर दिया। जिसमें सरकारी कर्मचारियों को संबोधन करते हुए उनसे वोट की अपील की गई थी। चुनाव अधिकारियों का मानना है कि सरकारी कर्मचारी चुनावी प्रक्रिया से जुड़े हैं। इसलिए सीधे उनको संबोधित करके वोट की अपील नहीं कर सकते हैं।