पहले लोकसभा चुनाव से अब तक दिल्ली की संसदीय सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की बढ़त बराबरी पर रही है। 1951 से 2014 तक 16 लोकसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली की जनता ने दोनों राजनीतिक दलों को बराबरी का दर्जा दिया, नतीजतन जीत में भागीदारी भी बराबर रही है।
लोकसभा चुनाव-2019 के लिए भी दोनों पार्टियां अपनी रणनीति के मुताबिक आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय राजधानी में अलग-अलग मुद्दों के साथ मैदान में उतरने वाले अलग-अलग पार्टियों के प्रत्याशियों का भविष्य 1.40 करोड़ मतदाता तय करेंगे।
पहले चुनाव में कांग्रेस को तीन सीटें मिली जबकि किसान मजदूर प्रजा पार्टी को एक सीट पर जीत हासिल हुई थी। 1967 में भारतीय जनसंघ को छह सीटों पर जीत मिली जबकि कांग्रेस को एक संसदीय क्षेत्र में जीत हासिल हुई।
वर्ष 1977 में जनता पार्टी/ बीएलडी को सात सीटों पर जीत मिली। इसी प्रकार 1989 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को चार, कांग्रेस को दो जबकि जनता दल को एक सीट पर जीत मिली।
1991, 1996 के चुनावों में भाजपा को पांच जबकि कांग्रेस को दो सीटों पर जीत मिली। 1998 में भाजपा छह, कांग्रेस एक जबकि महज एक साल बाद हुए चुनावों में दिल्ली की सभी सातों सीटों पर भाजपा को जीत मिली।
2004 में कांग्रेस को छह और 2009 में सभी सात सीटों पर जीत हासिल हुई। 2014 में सभी सात सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने विजय हासिल की। भाजपा के गठन से पहले जनता पार्टी और भारतीय जनसंघ ने दिल्ली की सीटों पर अपनी बढ़त बनाई।
लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सीटों पर राजनीतिक दलों की स्थिति
लोकसभा चुनाव वर्ष जीत का आंकड़ा
प्रथम 1951 कांग्रेस तीन, किसान मजदूर प्रजा पार्टी-1
द्वितीय 1957 कांग्रेस पांच
तृतीय 1962 कांग्रेस-पांच
चतुर्थ 1967 भारतीय जनसंघ-छह, कांग्रेस-एक
पांचवां 1971 कांग्रेस सात
छठा 1977 जनता पार्टी/ बीएलडी 7
सातवां 1980 कांग्रेस सात(इंदिरा)
आठवां 1984 कांग्रेस-सात
नौवां 1989 भाजपा चार, कांग्रेस दो, जनता दल एक
दसवां 1991 भाजपा पांच, कांग्रेस-दो
11 वां 1996 भाजपा पांच, कांग्रेस दो
12वा 1998 भाजपा छह, कांग्रेस एक
13 वां 1999 भाजपा सात
14 वां 2004 कांग्रेस छह, भाजपा एक
15 वां 2009 कांग्रेस सात
16 वां 2014 भाजपा सात