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दिल्ली विधानसभा चुनावः भाजपा और कांग्रेस ने केजरीवाल के सामने उतारे नए चेहरे

Wed, 22 Jan 2020 05:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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अरविंद केजरीवाल - फोटो : आप के ट्विटर अकाउंट से
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नई दिल्ली सीट पर भाजपा व कांग्रेस तमाम रणनीतिक कसरत के बाद भी आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने कोई दिग्गज प्रत्याशी नहीं उतार पाई।

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कांग्रेस ने जहां दूसरी सूची में रोमेश सभरवाल का नाम घोषित किया, वहीं भाजपा ने नामांकन के अंतिम दिन मंगलवार को सुनील यादव को केजरीवाल के सामने उतारा। 

राजनीतिक जानकारों का मानना है केजरीवाल के सामने दोनों ही प्रत्याशियों का कद वजनदार नहीं है। हालांकि यह चुनाव परिणाम के बाद ही पता चल पाएगा कि कांग्रेस-भाजपा ने केजरीवाल के सामने कैसा प्रदर्शन किया।
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वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री व कांग्रेस की दिग्गज शीला दीक्षित को शिकस्त देकर सियासत में प्रवेश करने वाले अरविंद केजरीवाल के सामने 2020 के चुनाव में विपक्षी दल कद्दावर चेहरा देने में नाकाम रहे हैं। 

भाजपा ने युवा मोर्चा के अध्यक्ष सुनील यादव और कांग्रेस ने एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे रोमेश सभरवाल पर दांव लगाया है। दोनों ही मुख्यधारा की राजनीति में नए चेहरे हैं।

भाजपा व कांग्रेस ने दिग्गज नेताओं की तलाश में अपनी पहली लिस्ट में नई दिल्ली सीट से प्रत्याशी घोषित नहीं किया था। इस बीच भाजपा से कवि कुमार विश्वास से लेकर दिवंगत केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी तक को नई दिल्ली सीट से उतारने की चर्चा रही। जबकि कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की बेटी लतिका व राजेश लिलोठिया को चुनावी मैदान में उतारने की कोशिश की।
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ताकत और कमजोरी
अरविंद केजरीवाल:
ताकत:
-दिल्ली के दो बार के मुख्यमंत्री के तौर पर भरोसेमंद चेहरा।
- हर वर्ग में पहचान।
-दिल्ली सरकार के पांच साल का कामकाज

कमजोरी:
- जातीय गणित में फिट नहीं।
- दिल्ली सरकार के अधिकारियों/कर्मचारियों की नाराजगी।
- उपलब्धता, आसानी से मुलाकात संभव नहीं।

सुनील यादव
ताकत:
- बतौर भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष युवा कार्यकर्ताओं में पकड़।
-नई दिल्ली की झुग्गियों में सक्रिय।
-पूर्वांचली पृष्ठभूमि।
--
कमजोरी
- मुख्यधारा की राजनीति में नहीं
- नौकरीपेशा वर्ग में विशेष पहचान नहीं।
-जातीय गणित के हिसाब से फिट नहीं।

रोमेश सभरवाल
ताकत
- छात्र राजनीति में सक्रिय होने से युवाओं से जुड़ने में महारत।
- स्थानीय निवासी होने से इलाके और मुद्दों की बारीक समझ।
- नौकरीपेशा वर्ग से जुड़ाव।

कमजोरी
- आखिरी वक्त मिला टिकट, अनजान चेहरा।
- प्रदेश इकाई का विश्वस्त न होना।
- कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ नहीं।

नई दिल्ली सीट का महानगरीय आधार
पूर्वी उत्तर प्रदेश      12 फीसदी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश   9 फीसदी
बिहारी                 9 फीसदी
पंजाबी                8 फीसदी
दक्षिण भारतीय       8 फीसदी
हरियाणवी            5 फीसदी
राजस्थानी            5 फीसदी
गढ़वाली             3 फीसदी
अन्य                10 फीसदी

(नोट: जातिगत व महानगरीय आंकड़े राजनीतिक पार्टियों से जुटाए गए हैं।)

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