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बिसाहड़ा बवाल: बीफ कांड पर सीबीआई जांच नहीं चाहती सरकार

Thu, 07 Apr 2016 06:27 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
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दादरी
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प्रदेश सरकार दादरी बीफ कांड की जांच सीबीआई से नहीं कराना चाहती है। सरकार का दावा है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। घटना एक हत्याकांड की है जिसमें ऐसा कुछ नहीं है जिसके आधार पर सीबीआई को इसकी जांच सौंपी जाए।
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सरकार का आरोप है कि अभियुक्त मुकदमे का ट्रायल लंबित करने और पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने के इरादे से जांच सीबीआई को ट्रांसफर कराना चाहता है। उसके द्वारा लगाए गए आरोपों और मामूली कमियों के आधार पर इस मामले को सीबीआई को सौंपे जाने का औचित्य नहीं है।

दादरी कांड के अभियुक्त के पिता संजय सिंह और एक अन्य सुराज सिंह की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पुलिस की चार्जशीट रद्द करने तथा मामले की जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग की गई है।
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याचिका में आरोप लगाया गया है कि राजनीतिक रंजिश के कारण याचीगण को फंसाया जा रहा है जबकि वे पूरी तरह से निर्दोष हैं। मामले की सुनवाई बुधवार को न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति राघवेंद्र की खंडपीठ में हुई।
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प्राथमिकी मृतक इकलाख की पत्नी ने दर्ज कराई है

- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
प्रदेश सरकार द्वारा इस मामले में अपना जवाब दाखिल किया गया। इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि चार मई नियत कर दी है। याची का कहना है कि पुलिस ने फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट के बिना ही चार्जशीट दाखिल कर दी है जो कि अनुचित है।

उनको इसलिए फंसाया जा रहा है क्योंकि वह भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हैं। अपर महाधिवक्ता इमरान उल्लाह ने प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि घटना की प्राथमिकी मृतक इकलाख की पत्नी ने दर्ज कराई है जो इस घटना की चश्मदीद गवाह है।

इकलाख के पुत्र दानिश को भी पीटकर गंभीर रूप से घायल किया गया है वह भी घायल और चश्मदीद गवाह है। घटना 28 सितंबर 2015 को रात साढ़े दस बजे की है और इसकी प्राथमिकी रात साढ़े ग्यारह बजे दर्ज करा दी गई।

पुलिस ने घटना की निष्पक्ष जांच की है। चश्मदीद गवाहों के बयानों को सत्यापित कर दर्ज किया गया है। पीड़ितों के पास ऐसी कोई वजह नहीं है कि वह असली मुल्जिमों को छोड़कर किसी निर्दोष को इस मामले में फंसाना चाहेंगे। चश्मदीद गवाहों ने अभियुक्तगण के नाम लिए हैं जिनमें याची का पुत्र भी शामिल है।
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फोरेंसिक रिपोर्ट के बिना चार्जशीट से इंकार नहीं

दादरी में नहीं मनी होली - फोटो : अमर उजाला
सरकार का कहना है कि यह घटना एक जघन्य और सोचे-समझे हत्याकांड की है इसमें ऐसा कुछ भी विशेष नहीं है जिसकी वजह से इसकी जांच सीबीआई को दी जानी चाहिए। हालांकि सरकार के हलफनामे में इस बात से इंकार नहीं किया गया है कि चार्जशीट बिना फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट मिले ही दाखिल की गई है।

इसके जवाब में कहा गया है कि हत्या इकलाक की पत्नी, बेटे और परिवार के लोगों के आंखों के सामने की गई है इसलिए फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट इस मामले में बहुत मायने नहीं रखती है। सरकार का कहना है कि अभियुक्त घटना को मीडिया द्वारा हाईलाइट करने का फायदा उठाना चाह रहे हैं।

अपर महाधिवक्ता इमरान उल्लाह ने बताया कि फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में ट्रायल कोर्ट में दाखिल की गई है। हाईकोर्ट में उन्होंने सरकार का जवाब दाखिल किया है।
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