उत्तर पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र की बाबरपुर विधानसभा सीट पर काबिज आम आदमी पार्टी के दिग्गज गोपाल राय की इस बार दिल्ली विधानसभा की राह आसान नहीं है। क्योंकि, भाजपा से चार बार विधायक रह चुके व वरिष्ठ नेता नरेश गौड़ और कांग्रेस की युवा नेता अनवीक्षा जैन उन्हें चुनौती दे रही हैं। तीनों नेता अपने-अपने स्तर पर एक-दूसरे को शिकस्त देने की लिए दिल्ली के रण में उतर चुके हैं।
गोपाल राय ने इस सीट को दोबारा फतह करने के लिए चक्रव्यूह तैयार किया है। हालांकि, 2013 चुनाव में नरेश गौड़ ने इसी सीट पर राय को शिकस्त दी थी। वहीं, गौड़ अपने तजुर्बे के दम पर विरोधियों को घेर रहे हैं। चुनावी मैदान में पहली बार उतरी अनवीक्षा जैन ने पारिवारिक पृष्ठभूमि व युवा जोश से सीट पर काबिज होने की रणनीति तैयार की हैं। तीनों के लिए जीत आसान नहीं है।
गोपाल राय की ताकत और कमजोरी
मजबूती :
. दिल्ली सरकार के मंत्री के तौर पर इलाके में किया गया काम।
. बतौर, पार्टी प्रदेश संयोजक कार्यकर्ताओं से संपर्क।
. मिलनसार व्यवहार के कारण लोगों से जुड़ाव।
कमजोरी :
. पार्टी व सरकार की अहम जिम्मेदारियों से इलाके में कम रहती है मौजूदगी।
. मंत्री के तौर पर मिलना नहीं रहता आसान।
. सत्ता में होने से लोगों में नाराजगी संभव।