औद्योगिक क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए, जो कल रात को महर्षि अस्पताल में नहीं थीं। लेखी ने कहा कि संबंधित फैक्टरी का लाइसेंस उत्तरी दिल्ली नगर निगम फरवरी 2015 में ही निरस्त करके डीएसआईआईडीसी को सूचित कर चुका था।
अब डीएसआईआईडीसी ही दिल्ली की जनता के प्रति जवाबदेह है कि यह अवैध फैक्टरी कैसे चल रही थी। 2012 के नगर निगम चुनाव से पूर्व जारी घोषणा पत्र में भाजपा ने दिल्ली की जनता से वादा किया था कि अनावश्यक लाइसेंस खत्म किए जाएंगे।
इसी के चलते उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने 6 अक्तूबर 2015 को एक प्रस्ताव पारित कर दिल्ली सरकार को सूचित कर दिया था कि अब हम वहां लाइसेंस देने का काम नहीं करना चाहते, क्योंकि इस स्वीकृत औद्योगिक क्षेत्र की कोई भी सेवा हमारे अधीन नहीं है।
सांसद डॉ. उदित राज ने कहा कि बवाना स्थित अस्पतालों में आग से उत्पन्न आपातकाल के मरीजों की देखरेख की कोई सुविधा नहीं है। डीएसआईआईडीसी के मुखिया मुख्यमंत्री हैं और मंत्री सतेंद्र जैन, गोपाल राय, इमरान हुसैन भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
उत्तरी दिल्ली की मेयर डॉ. प्रीति अग्रवाल ने कहा कि यह दुखद है कि मुख्यमंत्री अपनी अक्षमता को छुपाने के लिए असंवेदनशील ट्वीट करने में लगे हुए हैं।