रिपोर्ट कहती है कि किसी इमारत के निर्माण व फैक्टरी/ट्रेड का लाइसेंस दिल्ली नगर निगम एक्ट 1957 के तहत निगम प्रशासन ही देता है। बगैर एमसीडी कमिश्नर की अनुमति के कहीं भी फैक्टरी नहीं चलाई जा सकती।
एक्ट कहता है कि लेआउट प्लान के तहत इमारत के निर्माण व उसे खाली कराने की नियामक संस्था एमसडी है। कोई बिल्डिंग सुरक्षित नहीं है तो उसे खाली करने का आदेश निगम कमिश्नर ही जारी करता है।
फैक्टरी का लाइसेंस एक्ट के तहत जारी होता है। इस मामले में डीएसआईआईडीसी के पास कोई नियामक अधिकार नहीं है। वह न तो बिल्डिंग का लाइसेंस जारी करता है और न ही उसके पास फैक्ट्री चलाने का लाइसेंस देने का अधिकार है। कॉरपोरेशन पर औद्योगिक क्षेत्र के सिर्फ विकास की जिम्मेदारी है।