हसनपुर में रुके हुए विकास कार्यों व व्याप्त गंदगी को लेकर कस्बे के एक युवक ने सोशल मीडिया को अपना हथियार बना लिया। पहले उसने जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत अधिकारियों से गांव में विकास के लिए सरपंचों को मिली ग्रांट राशि की जानकारी मांगी।
इसके बाद फेसबुक पर पेज बनाकर लोगों को इससे जोड़ा और सरपंच को काम करने को मजबूर किया। इस काम से मनोज वशिष्ठ की हर तरफ तारीफ हो रही है।
हसनपुर निवासी मनोज वशिष्ठ उर्फ मन्नू ने गांव में व्याप्त गंदगी तथा अन्य समस्याओं को देखकर पीएम मोदी की बातों से प्रभावित होकर एक मुहिम शुरू करने की योजना बनाई।
बाशिंदा
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने जिम्मेदार लोगों से बातचीत की लेकिन सुनवाई होती नहीं दिखी। तब उसने एक आंदोलन चलाने की ठानी और आरटीआई के तहत जानकारी मांगी कि गांव में किस-किस सरपंच के कार्यकाल में कितनी-कितनी ग्रांट आई।
जानकारी मिलने से पूर्व ही मन्नू ने फेसबुक पर हसनपुर नाम से एक पेज बना दिया और उस पर वीडियो और फोटो के जरिये गांव की समस्याओं को यहां डालना शुरू किया।
शुरू में तो इस मुहिम का गांववासियों ने मजाक उड़ाया लेकिन धीरे-धीरे इस मुहिम से लगभग पांच सौ युवक जुड़ गए। समस्याओं को उन्होंने गांव के कार्यकारी सरपंच संजय बघेल के सामने रखना शुरू कर दिया।
गांव की तस्वीर
इसका नतीजा यह निकला कि सरपंच को भी गांव की समस्याओं वे ग्रामीणों को गुस्से का अनुभव हो गया। अब गांव के कई स्थानों पर सफाई अभियान शुरू किया गया है। इसके साथ ही कुछ विकास कार्य भी शुरू हो चुके हैं।
अभी भी कई मोहल्लों में गंदगी व्याप्त है। इसके लिए भी वे निरंतर अपने अभियान के तहत सरपंच के संपर्क में रहते हैं। लोगों को भी चाहिए कि वे भी सफाई व्यवस्था के लिए सरपंच व पंचायत का सहयोग करें। इसके अलावा कुछ लोग अपने मवेशियों को गलियों में खुले में बांधते हैं, इससे भी गंदगी होती है। जनहित में वे भी अपने मवेशियों को अपने घरों या अन्य स्थान पर रखें और उन स्थानों को साफ रखेंगे तो अच्छा होगा।
-मनोज वशिष्ट उर्फ मन्नू, निवासी हसनपुर।