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Delhi: साढ़े छह हजार में बनवाया आधार और पैन कार्ड, फिर पहुंच गया जर्मनी, ऐसे खुली पोल; जरा गलती से पहुंचा जेल

Tue, 21 Nov 2023 12:45 PM IST
शाहरुख खान राजीव कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक शख्स ने साढ़े छह हजार में आधार बनवाया। इसके बाद पैन कार्ड बनवाया। फिर वह जर्मनी पहुंच गया। दिल्ली हवाई अड्डे पर वापसी के दौरान बांग्लादेशी नागरिक पकड़ा गया। आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस के हवाले किया गया है। पुलिस ने धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज किया।
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फाइल फोटो
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विस्तार
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दो साल पहले बांग्लादेश का एक नागरिक घुसपैठ कर त्रिपुरा पहुंचा। स्थानीय लोगों की मदद से साढ़े छह हजार रुपये में उसने भारतीय जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवा लिया। उसके बाद वह पुणे पहुंचकर भारतीय दस्तावेज की मदद से पासपोर्ट बनवाने में कामयाब हो गया। 
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बांग्लादेशी नागरिक को विदेश में बसने की चाहत थी, इसलिए उसने बौद्ध भिक्षु बनकर आसपास के देशों की यात्रा की और फिर जर्मनी पहुंच गया। लेकिन वापसी के दौरान दिल्ली हवाई अड्डे पर दस्तावेजों की जांच में उसकी पोल खुल गई और वह सलाखों के पीछे पहुंच गया। आरोपी के पास से बांग्लादेश के कई दस्तावेज मिले हैं। 

पुलिस अब उन आरोपियों की पहचान करने में जुटी है, जिसने बांग्लादेशी नागरिक को भारतीय दस्तावेज मुहैया करवाने में मदद की है। पुलिस के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 18 नवंबर की देर रात पुणे का रहने वाला एक युवक अनिक रॉय जर्मनी से दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचा। उसे जर्मनी से निर्वासित किया गया था। 
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एयरपोर्ट अधिकारियों ने युवक के पास मौजूद दस्तावेजों की जांच की। जिसमें पता चला कि युवक भारतीय नागरिक नहीं बल्कि बांग्लादेश के चटगांव का रहने वाला है। धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद उसे आईजीआई एयरपोर्ट थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसका असली नाम अप्पू बरुआ है। 

उसने बताया कि 11 अगस्त 2021 को वह बांग्लादेश के बार्डर मतिरंगा से सबरूम बार्डर के जरिए त्रिपुरा में घुसपैठ किया। वह अगरतला के एक होटल में रुका। जहां उसने एक एजेंट की मदद से अगरतला के आईजीएम अस्पताल से जारी भारतीय जन्म प्रमाण पत्र बनवा लिया। इसके आधार पर उसने आधार कार्ड और फिर पैन कार्ड बनवा लिया। 

 

इसके लिए उसने एजेंट को 6500 रुपये दिए। उसके बाद वह 16 अगस्त को कोलकाता होते हुए पुणे पहुंचा। जहां उसने एक होटल में काम करना शुरू किया। बाद में वह शिवाजीनगर की एक सोसायटी में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम किया। वहां वह हुसैन नाम के युवक की मदद से अपने आधार कार्ड से त्रिपुरा का पता बदलवाया।
 

उसने बताया कि वह बांग्लादेशी चकमा आदिवासी है, जो बौद्ध धर्म का पालन करते हैं। उसने एक यूरोपीय देश में जाने और वहां बसने के लिए बौद्ध भिक्षु का रूप धारण करने का फैसला किया। उन्होंने खुद को गोम्पा संघ में पंजीकृत कराया। वह चीवर (भिक्षु पोशाक) धारण किया। उसके बाद उसने यात्रा इतिहास बनाने के लिए कंबोडिया, थाईलैंड और वियतनाम की यात्रा की। 
 
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फिर उसने एक प्रतिष्ठित बौद्ध गोम्पा (संघ) का सदस्यता पत्र बनाया। जिसका इस्तेमाल उसने स्पेन बौद्ध संघ से प्रस्ताव पत्र प्राप्त करने और शेंगेन वीजा प्राप्त करने के लिए किया। उसने जर्मनी की यात्रा की, लेकिन वहां पर उसे गलत दस्तावेज की वजह से पकड़ लिया गया और उसे भारत निर्वासित कर दिया गया।
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