छोटी भावज, बहन, बहू और बेटी यह चारों समान हैं, इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है उसे मारने में शास्त्रों के मुताबिक पाप नहीं होता। तीर लगने से जमीन पर गिर कर तड़प रहे बालि के सवाल पर रामचंद्र ने यह जवाब दिया।
इस पर बालि पूछता है कि उसे छिप कर क्यों तीर मारा, रामचंद्र जवाब देते हैं कि उसकी मुक्ति इसी तरह लिखी थी। मरते हुए बालि अपने बेटे अंगद को रामचंद्र के साथ रहने की हिदायत देता है।
यह दृश्य श्रीधार्मिक रामलीला के हैं। एनआईटी पांच की इस रामलीला में रविवार रात बालि वध और अशोक वाटिका उजाड़ने के प्रसंग का मंचन हुआ।
बालि बने नरेश चावला ने गरजदार आवाज में ‘छीन लूं दुश्मन का आधा बल मुझे यह वरदान है, युद्ध भूमि में तो बालि भगवान का भी भगवान है’ संवाद बोले तो पंडाल तालियों से गूंज उठा।
इस पर सुग्रीव बने नितिन कालिया ने जवाब दिया कि पड़े भाड़ में तू और तेरा मरतबा, अभी लूंगा तेरी हड्डियां चबा, पर भी दर्शकों ने तालियां बजाईं। बालि वध के बाद रामचंद्र ने हनुमान और उनके साथियों को सीता की खोज में रवाना किया।
रामचंद्र की अंगूठी लेकर हनुमान अशोक वाटिका पहुंचते हैं। यहां हनुमान बने जीतेश ने सीता को अंगूठी दी। भूखे हनुमान ने अशोक वाटिका में फल खाए और दर्शकों को भी उछाल उछाल कर बांटे।
हनुमान का बड़म बड़म कहना दर्शकों को बहुत भाया। हरिश चंद्र आजाद के निर्देशन में सभी कलाकारों ने बेहतरीन भूमिका निभाई।