हाईकोर्ट ने उनकी कस्टडी की अवधि और ट्रायल में हो रही देरी को देख दी जमानत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुकेश चंद्रशेखर के कहने पर 200 करोड़ रुपये की रंगदारी में शुक्रवार को दीपक रमनानी और प्रदीप रामदानी को जमानत दी है। हाईकोर्ट ने उनकी कस्टडी की अवधि और ट्रायल में हो रही देरी को देखते हुए उन्हें जमानत दी। हालांकि, तीन जून को पटियाला हाउस कोर्ट ने दोनों मामलों में सभी आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे।
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने कस्टडी की अवधि पर विचार करने के बाद दीपक रमनानी और प्रदीप रामदानी को जमानत दी। आरोपित अपराधों में दीपक और प्रदीप की भूमिका और उनके द्वारा काटी गई कस्टडी की अवधि को देखते हुए, न्यायमूर्ति ने कहा कि मेरी यह राय है कि वे जमानत पर रिहा होने के हकदार हैं। इसके अलावा, ईडी केस के संबंध में, बीएनएसएस की धारा 479 और इसी तरह की स्थिति वाले सह-आरोपियों के साथ समानता के लाभ को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति ने जमानत दी। पीठ ने अर्जियों को मंजूरी दी और आदेश दिया कि प्रदीप और दीपक को मकोका मामले में जमानत पर रिहा किया जाए, बशर्ते वे 2.5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही रकम की दो जमानतें दें।
हाईकोर्ट ने क भी आदेश दिया कि दीपक को पीएमएलए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत पर रिहा किया जाए, बशर्ते वह 2.5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही रकम की दो जमानत दें। वकील ने दीपक और प्रदीप की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि दोनों आरोपी लंबे समय से हिरासत में हैं। वहीं, इसी तरह के मामलों में शामिल अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। यह भी कहा गया कि यह 2021 का मामला है और मुकदमे की सुनवाई में देरी हो रही है। आरोप है कि आरोपियों ने सुकेश चंद्रशेखर के कहने पर पैसे लिए और उन्हें लाभार्थियों तक पहुंचाया।