- जेएनयू शिक्षक संघ ने शिक्षा व्यवस्था के केंद्रीकरण पर जताई चिंता, एनईपी 2020 वापस लेने की भी मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) शिक्षक संघ ने देश की शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते केंद्रीकरण को लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई है। संघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को वापस लेने की मांग की है। जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष सैयद अख्तर हुसैन और सचिव अविनाश कुमार ने कहा कि एनटीए और एनईपी 2020 ने शिक्षा प्रणाली की अकादमिक विश्वसनीयता, सामाजिक संरचना और संघीय व्यवस्था को कमजोर किया है। उनका कहना है कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय होने के बावजूद प्रवेश परीक्षाओं और मूल्यांकन प्रक्रियाओं का अत्यधिक केंद्रीकरण गंभीर चिंता का विषय है।
संघ के अनुसार वर्ष 2018 में गठित एनटीए को विश्वविद्यालयों और एआईसीटीई, यूजीसी, सीएसआईआर तथा आईसीएआर जैसे विशेषज्ञ संस्थानों की परीक्षाओं का दायित्व सौंपा गया था। लेकिन पिछले सात वर्षों में विशेष रूप से नीट-यूजी और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं में सामने आए विवादों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षक संघ ने कहा कि हालिया परीक्षा संबंधी विवाद संस्थागत विशेषज्ञता को निजी हितों और आउटसोर्सिंग के हवाले करने का परिणाम हैं, जिसका खामियाजा छात्रों और अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है। केवल अधिकारियों के तबादले या सीमित कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। संघ का आरोप है कि शिक्षा मंत्रालय की वर्तमान नीतियों के कारण शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हुई है और छात्रों व अभिभावकों में असंतोष बढ़ा है। इसी वजह से शिक्षक संघ ने एनईपी 2020 को वापस लेने, एनटीए को भंग करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई है।