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'डॉक्टर' बने पुलिसवाले, PCR वैन में जन्मी नन्हीं परी

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चंद दिनों पहले एक महिला से की गई बदसलूकी को लेकर ताने झेलने वाली दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को ढेरों दुआएं और सैकड़ों लाइक्स बटोरे।
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दुआएं उस मां से मिलीं, जिसने पीसीआर में नन्हीं परी को जन्म दिया और लाइक्स की झड़ी तब लग गई जब यह खबर सोशल मीडिया पर फैली।

पुलिस के दो जवानों की समझदारी के चलते अब जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। अब आलम ये है कि बच्ची के मां-बाप पुलिस का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे।

जब दो लोगों ने पीसीआर से लगाई गुहार

राजधानी के शांतिवन इलाके में शुक्रवार दोपहर करीब दो बजकर 50 मिनट पर एक पीसीआर अंबेडकर टर्मिनल से यमुना की ओर जा रही थी।

तभी दो मजदूर भागते हुए आए और पीसीआर को हाथ देकर रोका। उनमें से एक ने कहा, ‘साहब मेरी पत्नी गर्भवती है और उसे दर्द शुरू हो गया है। अस्पताल पहुंचाने में मदद करें।’

पीसीआर में कांस्टेबल सुनील और कांस्टेबल दीपक ड्यूटी पर थे। दोनों को दुनियादारी की जानकारी जरा कम, मगर समझदारी पूरी थी।
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और इस तरह पीसीआर में जन्मी नन्ही परी

कम उम्र और कम अनुभव के बावजूद जरा भी हिचके बिना वे मदद को राजी हो गए। उन्होंने बताया, ‘हमने महिला को पीसीआर में बिठा लिया।'

'हमें डिलीवरी से जुड़ी कोई जानकारी नहीं थी तो हमने वहीं मजदूरी कर रही दो और महिलाओं को साथ में ले लिया।’ अभी पीसीआर महज दो मिनट ही सर्विस लेन पर चली थी कि करीब तीन बजकर एक मिनट पर प्रसव शुरू हो गया।

उन्होंने पीसीआर को साइड में किया और सभी पुरुष दूर खड़े हो गए। साथ आई अन्य महिलाओं ने अपनी साड़ी से पीसीआर के अंदर परदा करके डिलीवरी करवा दी।

इसके तुरंत बाद उन्होंने बच्ची और मां को कस्तूरबा गांधी अस्पताल पहुंचाकर दाखिल करवाया। जब डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची और मां दोनों ठीक हैं तो दोनों पुलिसकर्मी हेडक्वार्टर को यह जानकारी देकर लौट गए। देर शाम तक ये खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई तो लोगों ने पुलिस की तारीफ करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
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