दिल्ली में ऑटो में जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) अनिवार्य किए जाने के दो साल बाद भी परिवहन विभाग इसे लागू करने में विफल रहा है।
दिल्ली में अभी भी करीब 35 हजार ऑटो ऐसे हैं जो कि बिना जीपीएस सड़कों पर दौड़ रहे हैं। दिल्ली की सड़कों पर वर्तमान में कुल एक लाख ऑटो को परमिट जारी करने का अधिकार है। जिसमें पुराने 55 हजार ऑटो भी शामिल हैं, जो पहले से सड़क पर बिना जीपीएस के उतरे थे।
बाद में 45 हजार ऑटो का परमिट जारी करने का आदेश हुआ। जिसे जारी करने का काम चल रहा है। इसमें बगैर जीपीएस के परमिट नहीं जारी किए जाने की व्यवस्था की गई। नतीजतन नए परमिट के तहत अभी तक सड़क पर उतर चुके करीब 40 हजार ऑटो में जीपीएस लगाया जा चुका है।
मगर पहले से सड़कों पर दौड़ रहे 55 हजार ऑटों में अभी तक करीब 35 हजार ऑटो ऐसे हैं जो कि बिना जीपीएस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। पहले जीपीएस नहीं लगाने पर फरवरी में परमिट कैंसल करने तक की चेतावनी दी गई।
इसके बाद बगैर जीपीएस फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने पर भी रोक लगा दी गई। हालांकि जीपीएस लगाने के लिए परिवहन विभाग ने सख्ती का बहुत फायदा नहीं हुआ।
जीपीएस का फायदा
वसंत विहार गैंगरेप की घटना के बाद राजधानी में सभी ऑटो में जीपीएस अनिवार्य कर दिया गया था। जीपीएस से लैस ऑटो में यह पता लगाया जा सकता है कि वह किस क्षेत्र में गया। जरूरत पड़ने पर ऑटो की ऑनलाइन लाइव ट्रैकिंग भी की जा सकती है।