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अथॉरिटी की पूर्व चेयरमैन के मकान जब्त

Sat, 28 Dec 2013 01:44 PM IST
अरविंद सिंह, नोएडा
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प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव व नोएडा प्राधिकरण की पूर्व चेयरमैन नीरा यादव ने सेक्टर 14ए स्थित अपना मकान सरेंडर कर दिया है।
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उन्होंने अपनी दोनों बेटियों के नाम सेक्टर 44 के प्लॉट भी सरेंडर कर दिए हैं। 1994 की आवासीय योजना में नीरा यादव को सेक्टर 32 और उनकी दोनों बेटियों को सेक्टर 51 व 44 में भूखंड मिले थे।

सेक्टर 32 आवासीय सेक्टर के रूप में नहीं बस सका, इस कारण नीरा यादव ने अपना प्लॉट नंबर 26 सेक्टर 14ए में कनवर्ट करवा लिया था।

450 वर्ग मीटर केइस भूखंड से सटे 112.5 वर्ग मीटर का भूखंड भी उसी में शामिल कर लिया। जबकि अपनी दोनों बेटियों का प्लॉट सेक्टर 44 केभूखंड संख्या ए-32 व ए 33 में कनवर्ट करवा लिया था।
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उन्होंने बीते शुक्रवार को तीनों भूखंड प्राधिकरण में सरेंडर कर दिए। कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए प्राधिकरण ने मंगलवार को ये तीनों ही भूखंड अपने कब्जे में ले लिए हैं।

मालूम हो कि गैरकानूनी तरीके से प्लॉट आवंटन का विवाद सुप्रीम कोर्ट चला गया था। इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया था कि क्यों न नीरा यादव, उनकी दो बेटियों सहित पांच आवंटियों के नाम आवंटित प्लॉट के अलावा मूल आवंटन को भी रद्द कर दिए जाए।

उसके बाद ही नीरा यादव ने ये प्लॉट सरेंडर कर दिए हैं। नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी आरएस यादव ने बताया कि नीरा यादव के प्राधिकरण ने इन पर अपना कब्जा ले लिया है।

क्या था मामला
प्राधिकरण ने 1994 आवासीय भूखंड योजना निकाली थी। तत्कालीन प्राधिकरण की चेयरमैन नीरा यादव, उनकी दो बेटियों के अलावा एक राजनीतिक पार्टी में उस समय के कद्दावर नेता और एक आईएएस के नाम भी भूखंड आवंटित हुए थे।

अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए इन आवंटियों ने अपने हिसाब से भूखंडों को मनचाहे सेक्टरों में कनवर्ट करवा लिया। वहीं, आवंटन में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए नोएडा एंट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन(एनईए) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई सहित कई समितियां जांच कर चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के कहने पर ही भूखंडों को कनवर्ट करने के लिए अपनाए गए मानकों की जांच की गई, जिसमें मानक पूरे नहीं करने की बात सामने आई।
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प्राधिकरण ने कनवर्जन प्लॉटों को रद्द कर दिया। हालांकि मूल आवंटन को बरकरार रखा। मगर हाल ही में जब सुप्रीम कोर्ट ने आवंटियों को यह नोटिस भेजा कि क्यों न कनवर्टेड भूखंडों के अलावा मूल आवंटन को भी रदद कर दिया जाए।

तब नीरा यादव ने कनवर्टेड के साथ ही मूल आवंटन को भी सरेंडर कर दिया, जिसके बाद प्राधिकरण ने इन संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया।
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