करीब 10 महीने पहले सांप्रदायिक दंगे की तपिश में जल रहे गांव अटाली में सौहार्द का माहौल दिखाई देने लगा है। रविवार को दोनों समुदाय के लोगों ने बैठककर विवादित धार्मिक स्थल के निर्माण का रास्ता निकाल लिया। जिसके तहत पुरानी जगह पर ही धार्मिक स्थल को बनाया जाएगा।
पंचायत की अध्यक्षता सरपंच प्रहलाद सिंह ने की। इस मौके पर पूर्व पुलिस आयुक्त सुभाष यादव, कालीरमण खाप के प्रधान सज्जन सिंह विशेष तौर पर मौजूद थे।
बता दें गांव में धार्मिक स्थल के निर्माण को लेकर 25 मई को दो समुदायों के बीच झगड़ा हो गया था। एक समुदाय विशेष के घरों में आगजनी और लूट हुई थी।
हालांकि 11 दिन बाद प्रशासन ने दोनों समुदाय के बीच समझौता कराकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। लेकिन एक जुलाई को हुई पत्थरबाजी से अधिकांश अल्पसंख्यक परिवारों ने गांव छोड़ दिया।
मामले पर जमकर राजनीतिक हुई लेकिन बीच का रास्ता नहीं निकल सका। नवंबर माह में खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत करने की कोशिश की।
जिसके बाद कुछ परिवारों ने गांव में दोबारा रहना शुरू कर दिया। लेकिन, मामला पूरी तरह से नहीं निपट पाया था। क्योंकि फैसले के मुताबिक गांव के बाहर धार्मिक स्थल नहीं बन पाया।
स्थल के लिए गांव के किसी व्यक्ति ने जगह नहीं दी। रविवार को करीब तीन घंटे के मंथन के बाद बीच का रास्ता निकाला गया। जिसमें पुरानी जगह पर धार्मिक स्थल बनाने और लाउडस्पीकर नहीं लगाने का फैसला हुआ।
जिसपर दोनों पक्षों ने सहमति दी। सरपंच प्रहलाद ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई। अब कोई तनाव नहीं है। गांव से पलायन कर चुके परिवारों को जल्द ही गांव में लाया जाएगा।
बैठक में कालीरमण खाप के सुरेंद्र चंदाना, रामस्वरूप, वीरेंद्र सिंह,मास्टर धर्मवीर, शाकिर, इशांक नंबरदार, सूलेमान, सुरेश, तारा, वेदप्रकाश, ऋषि, मास्टर मानवीर, बाबू राजेंद्र, अत्तर सिंह मेम्बर, डॉ. योगेंद्र, महावीर, बलदेव अलावलपुर, श्रवण, समयसिंह बाबू और एदल सहित सैंकड़ों लोग मौजूद थे।