ज्योतिषाचार्य शुभेश सरमन ने कहा कि मनुष्य का भाग्य कोई नहीं पढ़ सकता जो किस्मत में लिखा है वह अपने आप सामने आता है। इसमें ज्योतिष अहम भूमिका निभाता है। ज्योतिषी ग्रहों की चाल, गति और उनके प्रभाव को समझकर लाभ-हानि का आकलन कर सकता है। सही ज्योतिषी वही है जो ग्रहों की गणना के आधार पर भविष्य की सटीक तस्वीर पेश करे। ज्योतिषाचार्य रमेश सेनवाल ने ज्योतिष को शुद्ध विज्ञान बताया। उन्होंने कहा कि वैदिक आचार्यों ने सदियों पहले इस विज्ञान की खोज कर ली थी। आज के दौर में ज्योतिष की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है। ज्योतिषी एक साधक की तरह काम करता है।
स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल हो ज्योतिष
मुंबई से आए ज्योतिषाचार्य जेपी शर्मा ने ज्योतिष को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की जोरदार मांग की। उन्होंने कहा कि ज्योतिषियों को अक्सर 10 मिनट में भविष्य बताने की चुनौती दी जाती है, लेकिन यह इतना आसान नहीं। अंग्रेजों ने भारत की संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश की, जिसका असर ज्योतिष पर भी पड़ा। जीव के गर्भ में आते ही ग्रहों का प्रभाव शुरू हो जाता है। ज्योतिष इस प्रभाव को समझने और भविष्य बताने का सबसे बड़ा विज्ञान है। उन्होंने भटकाने वाले लोगों से बचने की सलाह दी और कहा कि ज्योतिष से बड़ा कोई विज्ञान नहीं।
ज्योतिष हमारे वेदों का नेत्र है
ज्योतिषाचार्य अनिल वत्स ने ज्योतिष को वेदों का नेत्र बताया। ज्योतिष दृश्य और दृष्टा को समझाने की ताकत रखता है। हर इंसान पिछले जन्म के कर्म और वर्तमान को जानना चाहता है। ज्योतिष श्रेयस (सही मार्ग) और प्रेयस (इच्छा) दोनों को समझाता है। हर व्यक्ति किसी खास तिथि और वार पर जन्म लेता है।
बढ़ रही ज्योतिष की ताकत
ज्योतिषाचार्य अरुण बंसल ने ज्योतिष को आधुनिक युग से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ज्योतिषियों को पहचान न मिलने की वजह उनका अधूरा ज्ञान है, लेकिन कंप्यूटर और एआई के युग में ज्योतिष की ताकत बढ़ रही है। उनके शोध में ज्योतिष के फार्मूले अलग पाए गए हैं। एक नियम अकेले काम नहीं करता।