दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल संत रविदास मंदिर के लिए सामने आए हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर कहा है कि संत रविदास मंदिर वाली वन-विभाग की जमीन को डिनोटिफाई कराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ढहाए गए मंदिर को दिल्ली सरकार केंद्र के सहयोग से दोबारा बनवाएगी।
पत्र में मुख्यमंत्री ने लिखा है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण ने 10 अगस्त 2019 को तुगलकाबाद गांव स्थित संत रविदास का मंदिर ढहा दिया था। इससे करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसके खिलाफ संत रविदास के अनुयायी दिल्ली ही नहीं, अन्य राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रविदास न केवल दलित समाज, बल्कि सभी समुदायों के श्रद्धेय संत थे। पिछली पांच शताब्दियों से संत रविदास की शिक्षाएं हर पीढ़ी को सशक्त बना रही हैं और दिशा दिखा रही हैं।
पत्र में लिखा है कि हालांकि मंदिर और अन्य संपत्तियां ढहा दी गई हैं, लेकिन अब भी मंदिर को दोबारा स्थापित करने की संभावनाएं बाकी हैं। बताया गया है कि मंदिर को दोबारा स्थापित करने और इस अन्याय को ठीक करने का अब भी अवसर है। जनता की भावनाओं के अनुरूप कार्य करने के लिए डीडीए अपने विवेक का इस्तेमाल कर सकता है। जमीन पर डीडीए का स्वामित्व है और केवल केंद्र ही इसे डिनोटिफाई कर सकता है। यह वन विभाग की जमीन है और इस पर डीडीए का नियंत्रण है।
जमीन के बदलाव को नोटिफाई करने के लिए दिल्ली सरकार के जरिए डीडीए को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को एक प्रस्ताव प्रस्तुत करने की जरूरत होगी। मुख्यमंत्री ने हरदीप सिंह पुरी को आश्वासन दिया है कि उनकी सरकार जमीन को डिनोटिफाई करने के प्रस्ताव पर तय समय सीमा के भीतर काम करेगी।
उन्होंने लिखा है कि भारत सरकार मंदिर का संचालन करने वाली सोसायटी को जमीन उपलब्ध करा दे तो आपके सहयोग से दिल्ली सरकार मंदिर का दोबारा निर्माण कराने में खुशी महसूस करेगी। इस मामले में दिल्ली के सोशल वेलफेयर मंत्री राजेंद्रपाल गौतम पहले ही डीडीए के उपाध्यक्ष को पत्र लिख चुके हैं। हालांकि इस पत्र का जवाब अब तक नहीं मिला है।