वाराणसी में बीजेपी के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ ताल ठोंकने वाले आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के एक बयान ने सियासी हलचल पैदा कर दी है।
केजरीवाल का यह बयान बनारस संसदीय सीट से मुख्तार अंसारी के नाम वापस लेने का सवाल पर आया था।
केजरीवाल के बयान को लेकर बवाल बढ़ा तो पार्टी के प्रवक्ता और दिल्ली की चांदनी चौक लोकसभा सीट से उम्मीदवार आशुतोष को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राजनीति के अपराधीकरण के सख्त खिलाफ है।
फिसल गई केजरी की जुबान!
दरअसल, मुख्तार अंसारी के बनारस से चुनाव लड़ने से मना करने के बाद केजरीवाल ने कहा कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी को हराने के लिए साथ चलने को तैयार सारी ताकतों का समर्थन लेने को वह तैयार हैं।
केजरी का बयान आने के बाद यह चर्चा चल गई थी कि मुख्तार अंसारी के भाई अफजल अंसारी और केजरीवाल के बीच दिल्ली में मुलाकात की शुरू हो गई है।
इसे मुख्तार अंसारी के गुरुवार के उस बयान से जोड़कर देखा गया, जिसमें उन्होंने बनारस में धर्मनिरपेक्ष वोटों को बंटवारा न होने देने की दलील देते हुए बनारस से चुनाव लड़ने से मना कर दिया था।
क्या यही है केजरीवाल की ईमानदार राजनीति?
अंसारी के चुनाव मैदान से हटने के सिसायी नफे-नुकसान का आकलन सियासी गलियारे में किया जाने लगा। इस सबके बीच शुक्रवार को अमृतसर के रोड शो में केजरीवाल का बयान आया।
सूत्र बताते हैं कि अफजल और केजरीवाल के बीच दिल्ली में कई बार बातचीत हुई है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि केजरीवाल को मुख्तार अपना समर्थन दे सकते हैं।
केजरी के बयान पर विपक्षियों ने AAP की नीयत पर हमला बोला। उनकी दलील थी कि ईमानदार राजनीति करने के लिए सियासत में उतरे केजरीवाल पूर्वांचल के डॉन से भी समझौता करने को तैयार हैं।