अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन से आबकारी मामले में गिरफ्तार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की चिकित्सा जांच के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन व पत्नी के वीडियो कांफ्रेंस से जुड़ने के मुद्दे पर जवाब मांगा है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में जवाब दाखिल करने के तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि केजरीवाल वर्तमान में ईडी की हिरासत में नहीं हैं, बल्कि न्यायिक हिरासत में हैं ऐसे में ईडी याचिका पर आपत्ति नहीं कर सकती।
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अनुरोध किया है कि पत्नी को उनके मेडिकल चेकअप के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मिलने की अनुमति दी जाए। राउज एवन्यू कोर्ट के न्यायाधीश मुकेश कुमार ने ईडी से कहा कि केजरीवाल न्यायिक हिरासत में हैं, ईडी हिरासत में नहीं। अगर उन्हें कोई राहत चाहिए तो आपकी कोई भूमिका नहीं है। अदालत ने सुनवाई शनिवार तय की है।
उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ईडी से कहा कि वह तिहाड़ जेल में केजरीवाल के मेडिकल चेकअप से संबंधित उनके अनुरोधों पर आपत्ति नहीं कर सकता। केजरीवाल वर्तमान में कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।
अपनी याचिका में केजरीवाल ने यह भी अनुरोध किया है कि उन्हें अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में मेडिकल बोर्ड को जानकारी देने की अनुमति दी जाए। अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने एम्स को केजरीवाल की जांच करने के लिए गठित करने का निर्देश दिया था, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उन्हें अपने शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन की आवश्यकता है या नहीं।
केजरीवाल को 21 मार्च को ईडी ने इस आरोप में गिरफ्तार किया था कि वह 2021-22 के लिए अब समाप्त हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति में जानबूझकर खामियाँ छोड़ने की साजिश का हिस्सा थे, ताकि कुछ शराब विक्रेताओं को लाभ पहुँचाया जा सके।
ईडी ने आरोप लगाया है कि शराब विक्रेताओं से प्राप्त रिश्वत का इस्तेमाल गोवा में आम आदमी पार्टी (आप) के चुनावी अभियान के लिए किया गया था और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक होने के नाते केजरीवाल व्यक्तिगत रूप से और अप्रत्यक्ष रूप से धन शोधन के अपराध के लिए उत्तरदायी हैं। इसी मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य आप नेताओं में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह (जमानत पर बाहर) शामिल हैं।
केजरीवाल 10 मई तक जेल में रहे, जब सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करने के लिए उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करने की अनुमति दी। शीर्ष अदालत द्वारा दी गई अंतरिम जमानत अवधि समाप्त होने के बाद वह 2 जून को जेल लौट आए। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने चिकित्सा आधार पर सात दिनों की अंतरिम जमानत की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया था। हालांकि, उस याचिका को न्यायाधीश बावेजा ने 5 जून को खारिज कर दिया था।