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सेहत पर दें ध्यान: गर्भवती में खून की कमी से शिशु में मधुमेह का खतरा, करीब 50 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित

Mon, 26 Sep 2022 10:03 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

महिलाओं व छोटे बच्चों में आ रही समस्याओं को लेकर नेशनल एसोसिएशन फॉर रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ ऑफ इंडिया (नारची) ने नारचीकॉन- 2022 का आयोजन किया है। इसमें एम्स, सफदरजंग, लेडी हार्डिंग सहित दुनियाभर के अस्पतालों से आई प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डॉक्टरों ने महिलाओं और बच्चों को होने वाली समस्या पर चर्चा की। 
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गर्भवती महिला - फोटो : shutterstock
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विस्तार
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गर्भवती मां में खून की कमी से उसके बच्चे को मधुमेह और तनाव जैसी बीमारी हो सकती है। बावजूद इसके महिलाएं अपने खाने-पीने पर ध्यान नहीं देती। परिवार और बच्चों की देखभाल में लगी रहती हैं। इस कारण 50 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया का शिकार हैं। एनेमिक महिलाओं के कारण 5 साल उम्र के 60 फीसदी बच्चों में भी खून की कमी पाई जा रही है। 

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महिलाओं व छोटे बच्चों में आ रही समस्याओं को लेकर नेशनल एसोसिएशन फॉर रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ ऑफ इंडिया (नारची) ने नारचीकॉन- 2022 का आयोजन किया है। इसमें एम्स, सफदरजंग, लेडी हार्डिंग सहित दुनियाभर के अस्पतालों से आई प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डॉक्टरों ने महिलाओं और बच्चों को होने वाली समस्या पर चर्चा की। 

कार्यक्रम के समापन पर माता गुजरी अस्पताल की वरिष्ठ सलाहकार व नारची की नई अध्यक्ष डॉ. अचला बत्रा ने बताया कि गर्भवती महिलाएं सेहत का ध्यान नहीं रखती। खाना-पीना और गर्भावस्था के दौरान आयरन की गोली भी समय पर नहीं लेने के कारण 50 फीसदी में एनीमिया है। इससे महिलाओं में सुस्ती, थकान, चक्कर आना, सांस की समस्या, जल्द इंफेक्शन का शिकार होना सहित अन्य समस्या होती हैं। वहीं इन महिलाओं के नवजात बच्चों में एक समय के बाद मधुमेह, तनाव जैसे रोग होने का खतरा रहता है। देश को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है। 
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थायराइड से पीड़ित को ध्यान देने की जरूरत 
अक्सर महिलाओं में गर्भधारण नहीं होने की दिक्कत आती है। इन महिलाओं में थायराइड, उच्च रक्तचाप, मधुमेह जैसी दिक्कत रहती है। सफदरजंग अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. सरिता श्यामसुंदर ने बताया कि चर्चा के दौरान डॉक्टरों को बताया गया कि ऐसी महिलाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।

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